देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में 'लीगल डाटाबेस मनुपात्रा' पर आधारित एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में विधि विभाग के छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अदालतों के निर्णयों का त्वरित संपादकीय सारांश प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के माध्यम से अदालतों के लंबे फैसलों का मुख्य सार तैयार करने और उसे डाटाबेस के जरिए प्राप्त करने की जानकारी दी गई।
देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने बताया कि आज के तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग तकनीक के उपयोग से लीगल डाटाबेस में कानूनी निर्णयों के संदर्भ आसानी से खोजे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्नत सर्च इंटरफेस की मदद से किसी भी मामले को केस नंबर, न्यायाधीश के नाम, याचिकाकर्ता या प्रतिवादी के नाम, अथवा विशिष्ट अधिनियम या धारा के आधार पर कुछ ही सेकंड में ढूंढा जा सकता है।
सेमिनार में मनुपात्रा डाटाबेस के एरिया हेड अमरेंद्र नाथ ने बताया कि यह डाटाबेस अदालती निर्णयों का एक विशाल संग्रह है। मनुपात्रा के पास भारत के सर्वोच्च न्यायालय, देश के सभी उच्च न्यायालयों और विभिन्न न्यायाधिकरणों के साथ-साथ 14 से अधिक अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के निर्णयों का व्यापक डिजिटल संग्रह उपलब्ध है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव त्यागी ने सेमिनार की उपयोगिता पर प्रकाश डाला, जबकि पुस्तकालय अध्यक्ष रेखा ठाकुर ने मुख्य वक्ता अमरेंद्र नाथ का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. विनोद जोशी, आकांशा भट्ट, हिमांशु जखमोला, डॉ. राजन हांडा, इशिका शर्मा, शिवांगी पाठक और स्माइल गोयल सहित लॉ स्कूल के अनेक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में 'लीगल डाटाबेस मनुपात्रा' पर आधारित एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में विधि विभाग के छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अदालतों के निर्णयों का त्वरित संपादकीय सारांश प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के माध्यम से अदालतों के लंबे फैसलों का मुख्य सार तैयार करने और उसे डाटाबेस के जरिए प्राप्त करने की जानकारी दी गई।
देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने बताया कि आज के तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग तकनीक के उपयोग से लीगल डाटाबेस में कानूनी निर्णयों के संदर्भ आसानी से खोजे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्नत सर्च इंटरफेस की मदद से किसी भी मामले को केस नंबर, न्यायाधीश के नाम, याचिकाकर्ता या प्रतिवादी के नाम, अथवा विशिष्ट अधिनियम या धारा के आधार पर कुछ ही सेकंड में ढूंढा जा सकता है।
सेमिनार में मनुपात्रा डाटाबेस के एरिया हेड अमरेंद्र नाथ ने बताया कि यह डाटाबेस अदालती निर्णयों का एक विशाल संग्रह है। मनुपात्रा के पास भारत के सर्वोच्च न्यायालय, देश के सभी उच्च न्यायालयों और विभिन्न न्यायाधिकरणों के साथ-साथ 14 से अधिक अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के निर्णयों का व्यापक डिजिटल संग्रह उपलब्ध है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव त्यागी ने सेमिनार की उपयोगिता पर प्रकाश डाला, जबकि पुस्तकालय अध्यक्ष रेखा ठाकुर ने मुख्य वक्ता अमरेंद्र नाथ का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. विनोद जोशी, आकांशा भट्ट, हिमांशु जखमोला, डॉ. राजन हांडा, इशिका शर्मा, शिवांगी पाठक और स्माइल गोयल सहित लॉ स्कूल के अनेक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।