पिछोर । शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। इस बार विधायक ने कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना मित्र बताते हुए उसके जीवन का खुलकर जिक्र किया। इतना ही नहीं, उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है विपक्षी दलों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी विधायक के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
* (पाल-बघेल समाज के कार्यक्रम में दिया बयान) पिछोर में आयोजित पाल-बघेल समाज के विशाल सामाजिक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाजजन उपस्थित थे। कार्यक्रम में लोकगायक मनोज बघेल सहित कई प्रमुख सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद रहीं।
अपने संबोधन के दौरान विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि उनका और रामबाबू गड़रिया का वर्ष पुराना संबंध रहा है।
उन्होंने मंच से कहा- "हम एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। मैं रामबाबू की परिस्थितियों को अच्छी तरह जानता था। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। अन्यथा वह ऐसा व्यक्ति नहीं था जो डकैत बनता।"
("डकैत और गुंडे भी इंसान होते हैं") अपने भाषण में विधायक ने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला पर अत्याचार हुआ था, जिसकी आवाज उन्होंने उठाई थी उस दौरान हजारों लोगों के साथ उन्होंने कमिश्नरी का घेराव किया था "उस समय लोगों को सिर्फ इतना दिखाई देता था कि एक गुंडा एक डकैत का सहयोग कर रहा है, लेकिन क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते ? /इस बयान के बाद समारोह स्थल पर मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बन गया।
(जेल से जंगल तक की यादें साझा की) विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि उन्हें रामबाबू गड़रिया के जीवन से जुड़ी तमाम घटनाएं आज भी याद हैं। उन्होंने कहा- "मुझे उसकी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक बात याद है। हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला। "यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है (पाल-बघेल समाज के साथ खड़े रहने की ली शपथ) कार्यक्रम में विधायक ने पाल-बघेल समाज के हितों की रक्षा का भी संकल्प लिया और कहा- "जिस प्रकार मैंने रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, उसी तरह पाल-बघेल समाज का भी साथ दूंगा। कभी पीछे नहीं हटूंगा हमारी संस्कृति न अत्याचार करने की है और न अत्याचार सहने की। "उन्होंने समाज को एकजुट रहने का संदेश देते हुए कहा- "न अन्याय करेंगे और न अन्याय सहेंगे।"
* ('ढाई किलो के हाथ' वाला बयान भी चर्चा में)*
अपने संबोधन के दौरान विधायक ने फिल्मी अंदाज में कहा-
"जब मैंने रामबाबू का साथ दिया था तब मेरा हाथ ढाई किलो का था, लेकिन अब आप लोगों ने उसे बढ़ाकर ढाई सौ किलो का कर दिया है। आपकी रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रीतम लोधी का ढाई सौ किलो का हाथ हमेशा तैयार रहेगा उन्होंने अंत में कहा- "दीप से दीप जलाते चलो, पिछोर में प्रेम की गंगा बहाते चलो।"
(पहले भी विवादों में रह चुके हैं विधायक) यह पहला अवसर नहीं है जब विधायक प्रीतम लोधी अपने बयान को लेकर विवादों में आए हों। हाल ही में उन्होंने करैरा के एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी उस दौरान उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा था-
"करैरा तेरे डैडी का नहीं है, एसडीओपी। करैरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा अगर तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना इस बयान को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी.
(आखिर कौन था कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया यह हम आपको बताते हैं) दरअसल चंबल अंचल के चर्चित डकैतों में शामिल रामबाबू गड़रिया का नाम लंबे समय तक दहशत का पर्याय बना रहा बताया जाता है कि पारिवारिक और सामाजिक विवादों की एक श्रृंखला ने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेला जानकारी के अनुसार, रघुवर गड़रिया, रामबाबू गड़रिया, दयाराम, गोपाल और प्रताप आपस में रिश्तेदार थे। वर्ष 1998 में एक पारिवारिक विवाद के बाद हालात बिगड़ गए। विवाद इतना बढ़ा कि रघुवर, रामबाबू और दयाराम पर एक रिश्तेदार की हत्या का आरोप लगा और वे फरार हो गए घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया तत्कालीन ग्वालियर एसपी प्रदीप रुनवाल ने गांव का दौरा किया और सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा एक और हत्या किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद पीड़ित परिवार को गांव छोड़ना पड़ा।
पिछोर । शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। इस बार विधायक ने कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना मित्र बताते हुए उसके जीवन का खुलकर जिक्र किया। इतना ही नहीं, उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है विपक्षी दलों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी विधायक के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
* (पाल-बघेल समाज के कार्यक्रम में दिया बयान) पिछोर में आयोजित पाल-बघेल समाज के विशाल सामाजिक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाजजन उपस्थित थे। कार्यक्रम में लोकगायक मनोज बघेल सहित कई प्रमुख सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद रहीं।
अपने संबोधन के दौरान विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि उनका और रामबाबू गड़रिया का वर्ष पुराना संबंध रहा है।
उन्होंने मंच से कहा- "हम एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। मैं रामबाबू की परिस्थितियों को अच्छी तरह जानता था। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। अन्यथा वह ऐसा व्यक्ति नहीं था जो डकैत बनता।"
("डकैत और गुंडे भी इंसान होते हैं") अपने भाषण में विधायक ने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला पर अत्याचार हुआ था, जिसकी आवाज उन्होंने उठाई थी उस दौरान हजारों लोगों के साथ उन्होंने कमिश्नरी का घेराव किया था "उस समय लोगों को सिर्फ इतना दिखाई देता था कि एक गुंडा एक डकैत का सहयोग कर रहा है, लेकिन क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते ? /इस बयान के बाद समारोह स्थल पर मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बन गया।
(जेल से जंगल तक की यादें साझा की) विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि उन्हें रामबाबू गड़रिया के जीवन से जुड़ी तमाम घटनाएं आज भी याद हैं। उन्होंने कहा- "मुझे उसकी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक बात याद है। हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला। "यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है (पाल-बघेल समाज के साथ खड़े रहने की ली शपथ) कार्यक्रम में विधायक ने पाल-बघेल समाज के हितों की रक्षा का भी संकल्प लिया और कहा- "जिस प्रकार मैंने रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, उसी तरह पाल-बघेल समाज का भी साथ दूंगा। कभी पीछे नहीं हटूंगा हमारी संस्कृति न अत्याचार करने की है और न अत्याचार सहने की। "उन्होंने समाज को एकजुट रहने का संदेश देते हुए कहा- "न अन्याय करेंगे और न अन्याय सहेंगे।"
* ('ढाई किलो के हाथ' वाला बयान भी चर्चा में)*
अपने संबोधन के दौरान विधायक ने फिल्मी अंदाज में कहा-
"जब मैंने रामबाबू का साथ दिया था तब मेरा हाथ ढाई किलो का था, लेकिन अब आप लोगों ने उसे बढ़ाकर ढाई सौ किलो का कर दिया है। आपकी रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रीतम लोधी का ढाई सौ किलो का हाथ हमेशा तैयार रहेगा उन्होंने अंत में कहा- "दीप से दीप जलाते चलो, पिछोर में प्रेम की गंगा बहाते चलो।"
(पहले भी विवादों में रह चुके हैं विधायक) यह पहला अवसर नहीं है जब विधायक प्रीतम लोधी अपने बयान को लेकर विवादों में आए हों। हाल ही में उन्होंने करैरा के एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी उस दौरान उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा था-
"करैरा तेरे डैडी का नहीं है, एसडीओपी। करैरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा अगर तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना इस बयान को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी.
(आखिर कौन था कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया यह हम आपको बताते हैं) दरअसल चंबल अंचल के चर्चित डकैतों में शामिल रामबाबू गड़रिया का नाम लंबे समय तक दहशत का पर्याय बना रहा बताया जाता है कि पारिवारिक और सामाजिक विवादों की एक श्रृंखला ने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेला जानकारी के अनुसार, रघुवर गड़रिया, रामबाबू गड़रिया, दयाराम, गोपाल और प्रताप आपस में रिश्तेदार थे। वर्ष 1998 में एक पारिवारिक विवाद के बाद हालात बिगड़ गए। विवाद इतना बढ़ा कि रघुवर, रामबाबू और दयाराम पर एक रिश्तेदार की हत्या का आरोप लगा और वे फरार हो गए घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया तत्कालीन ग्वालियर एसपी प्रदीप रुनवाल ने गांव का दौरा किया और सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा एक और हत्या किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद पीड़ित परिवार को गांव छोड़ना पड़ा।