लाठियां उठीं तो कांप उठे शराब माफिया: सहरिया महिलाओं ने कफार गांव में तोड़े अवैध शराब के अड्डे, महुआ और कच्ची शराब सड़क पर फेंकी
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी महिलाओं ने खुद खोला मोर्चा, बोलीं— अब गांव में नहीं चलने देंगे नशे का कारोबार
📰 अतुल कुमार जैन
खनियाधाना। शिवपुरी जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफार गांव में गुरुवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वर्षों से अवैध कच्ची शराब के कारोबार से त्रस्त सहरिया आदिवासी महिलाओं का सब्र आखिरकार टूट गया। हाथों में लाठियां लेकर दर्जनों महिलाएं गांव में संचालित अवैध शराब के ठिकानों पर पहुंचीं और वहां रखे शराब बनाने के उपकरण तोड़ दिए। तैयार कच्ची शराब, महुआ और अन्य सामग्री को सड़क पर फेंक दिया। इस दौरान पूरे घटनाक्रम के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें महिलाएं शराब के अड्डों को ध्वस्त करती नजर आ रही हैं।
करीब दो हजार की आबादी वाले कफार गांव में महिलाओं का कहना है कि यह विरोध किसी व्यक्तिगत विवाद का नहीं, बल्कि अपने परिवारों और आने वाली पीढ़ी को नशे की दलदल से बचाने का आंदोलन है।
-: शराब ने उजाड़ दिए कई परिवार, महिलाओं का छलका दर्द :-
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गांव में लंबे समय से खुलेआम कच्ची शराब बनाई और बेची जा रही है। इसका सबसे अधिक असर मेहनत-मजदूरी करने वाले गरीब परिवारों पर पड़ा है। पुरुष दिनभर की मजदूरी का अधिकांश पैसा शराब में उड़ा देते हैं, जिससे घरों में आर्थिक संकट गहरा गया है।
महिलाओं का कहना है कि नशे की वजह से घरों में आए दिन विवाद, मारपीट और पारिवारिक कलह होती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
-: कई बार शिकायत की, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई :-
महिलाओं ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार की शिकायत कई बार पुलिस और आबकारी विभाग से की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। जब जिम्मेदार विभागों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तब महिलाओं ने स्वयं सामाजिक स्तर पर विरोध का निर्णय लिया।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में वीरन आदिवासी, जितेंद्र सहित तीन-चार स्थानों पर लंबे समय से कच्ची शराब तैयार की जा रही थी। महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोबारा गांव में शराब बनाने या बेचने का प्रयास हुआ तो फिर इसी तरह सामूहिक विरोध किया जाएगा।
-: सिर्फ कफार नहीं, पूरी सहरिया बस्तियों में फैला है नशे का जाल :-
सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन ने दावा किया कि शिवपुरी जिले की अधिकांश सहरिया आदिवासी बस्तियां अवैध शराब और नशे के कारोबार की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी का फायदा उठाकर शराब माफिया पूरे समाज को नशे की गिरफ्त में धकेल रहे हैं। उनका कहना है कि सबसे अधिक नुकसान उन परिवारों को हो रहा है जो पहले से ही आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
-: 'नशे से दूरी है जरूरी' के दावों पर उठे सवाल :-
इस घटना ने प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकारी स्तर पर "नशे से दूरी है जरूरी" जैसे जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी बस्तियों में खुलेआम कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री जारी रहने से अभियान की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती तो महिलाओं को खुद लाठियां उठाकर शराब के अड्डे ध्वस्त करने की नौबत नहीं आती।
-: चार दिन पहले लिया था बड़ा सामाजिक संकल्प :-
बताया गया कि 12 जुलाई को आयोजित सहरिया चौपाल में समाज ने नशामुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। बैठक में तय किया गया था कि यदि कोई व्यक्ति शराब पीते हुए पाया जाता है तो उस पर 5,100 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। साथ ही शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सामूहिक सामाजिक कार्रवाई की जाएगी।
कफार गांव की महिलाओं का यह आंदोलन उसी सामाजिक संकल्प का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
-: पुलिस बोली— सूचना मिलने पर भेजा गया बल :-
खनियाधाना थाना प्रभारी केदार सिंह यादव ने बताया कि घटना की प्रारंभिक जानकारी उन्हें बाद में मिली। सूचना मिलते ही पुलिस बल गांव भेजा गया है और पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि अवैध शराब का कारोबार पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-: अब सबसे बड़ा सवाल... :-
कफार गांव की महिलाओं ने जिस साहस के साथ शराब माफिया के खिलाफ मोर्चा खोला है, उसने पूरे जिले में एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि जब आदिवासी महिलाएं अपने परिवार और समाज को बचाने के लिए स्वयं सड़क पर उतर सकती हैं, तो अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसियां अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर सकीं?
यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो कफार गांव से उठी यह चिंगारी पूरे जिले की सहरिया बस्तियों में एक बड़े नशामुक्ति आंदोलन का रूप ले सकती है।

📸 और तस्वीरें
×