कल्याण अहिरवार चंदेरी
चन्देरी। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ प्राचीन मंदिर चन्देरी में बुधवार को भगवान श्री पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। कार्यक्रम परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शिष्या एवं परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका श्री अपूर्वमति माताजी एवं अनुत्तरमति माताजी के परम सानिध्य में संपन्न हुआ।
महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6:45 बजे मंगल बेला में विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ मंगलाष्टक पाठ से हुआ। इसके उपरांत मंदिर के मूलनायक भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का विधि-विधानपूर्वक रजत कलशों से अभिषेक किया गया।
अभिषेक का प्रथम सौभाग्य चन्देरी निवासी चक्रेश कुमार, नितेश कुमार उत्सव शास्त्री परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि दूसरे रजत कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सविनय कुमार एवं शिरीष कुमार बजाज परिवार को मिला। इसके साथ ही नगर के अनेक श्रद्धालु एवं पुजारियों ने भी रजत कलशों से भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक कर पुण्यार्जन किया।
अभिषेक के पश्चात भगवान श्री पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर भगवान के चरणों में 23 किलोग्राम का निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चौबीसी के अध्यक्ष राकेश कुमार कठरया एवं परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं श्रद्धालुओं के लिए मिष्ठान वितरण संजय कुमार समैया परिवार की ओर से किया गया।
क्षमा ही आत्मकल्याण का मार्ग : आर्यिका माताजी
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री अपूर्वमति माताजी ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनके क्षमा भाव को जैन दर्शन की महत्वपूर्ण आधार भावना बताते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने विपरीत परिस्थितियों और उपसर्गों के बीच भी समता, करुणा और क्षमा का मार्ग नहीं छोड़ा। उनके जीवन से प्रत्येक व्यक्ति को आत्मकल्याण की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज और विश्व को भगवान पार्श्वनाथ के अहिंसा, क्षमा, संयम और करुणा के संदेश को आत्मसात करने की आवश्यकता है। मनुष्य यदि अपने भीतर के क्रोध, मान, माया, लोभ और द्वेष पर विजय प्राप्त कर ले तो यही वास्तविक आत्मकल्याण की दिशा में कदम है।
माताजी ने कहा कि क्षमा का भाव केवल किसी दूसरे की भूल को क्षमा करना नहीं, बल्कि अपने मन को वैर और कटुता के बोझ से मुक्त करना है। भगवान पार्श्वनाथ का जीवन हमें सिखाता है कि वैर का उत्तर वैर से नहीं, बल्कि क्षमा और करुणा से देना चाहिए।
महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना की और विश्व में शांति, समृद्धि एवं सर्वजीव कल्याण की मंगल कामना की।
मंदिर में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर चन्देरी की समृद्ध जैन धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में नमन कर उनके अहिंसा, क्षमा और आत्मसंयम के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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