रिपोर्टर कल्याण अहिरवार
चन्देरी। परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शिष्या एवं परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती आर्यिका श्री अपूर्वमति माता जी एवं अनुत्तरमति माता जी के पावन सानिध्य में 15 अगस्त की प्रातःकाल जैन समाज द्वारा स्वतंत्रता दिवस श्रद्धा, उल्लास और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में धर्म और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रातःकाल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। दिव्य घोष की लय और देशभक्ति के वातावरण के बीच ध्वजारोहण हुआ। जैन महिला मंडल द्वारा राष्ट्रीय गान एवं राष्ट्रगीत की सुंदर प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात युवक मंडल ने अनुशासित परेड करते हुए राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। तिरंगे की शान में पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परम पूज्य माताजी ने उपस्थित समाजजनों को राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र निर्माण में जैन समाज के योगदान की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने अहिंसा, सत्य, त्याग, सेवा, सद्भाव और परोपकार के माध्यम से देश और समाज के निर्माण में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। धर्म के संस्कारों के साथ मातृभूमि के प्रति कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना भी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में होनी चाहिए।
समारोह में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा राष्ट्रीय महापुरुषों का जीवंत अभिनय विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों ने विभिन्न महापुरुषों के स्वरूप और उनके जीवन-संदेश को अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित समाजजनों ने खूब सराहा।
दिव्य घोष, तिरंगे की शान, राष्ट्रगान की गूंज और बच्चों की देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को यादगार बना दिया। धार्मिक वातावरण में राष्ट्रभक्ति की यह लहर जैन समाज की राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायी संदेश दे गई।
समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु, महिला मंडल, युवक मंडल एवं बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, शांति और समृद्धि के लिए अपना योगदान देने का संकल्प लिया।

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