मंगलवार को राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन मनोहर लाल पंथ एवं सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने कलैक्ट्रेट सभागार में राजस्व अधिकारियों एवं निर्माण कार्यदायी संस्थाओं के स
ाथ दोनों विधानसभाओं में चल रहे राजस्व एवं विकास कार्यों की समीक्षा की उन्होंने समीक्षा करते हुए संयुक्त रुप से कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिये कि वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 एवं 2025-2
6 से लंबित परियोजनाओं को अब और लंबित रखना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा साथ ही, जिन परियोजनाओं का लोकार्पण अथवा शिलान्यास माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा किया जा चुका है, उनमें शिलापट्
टिका स्थापित न होना अथवा स्थलीय निरीक्षण न कराना शासन की मंशा की अवहेलना माना जाएगा ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग, कार्यदायी संस्था एवं उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध माननीय मुख्यमंत्री कार्
यालय को तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी तथा आवश्यकतानुसार उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए विभागीय कार्रवाई, वित्तीय दायित्व निर्धारण एवं प्रचलित विधिक प्रावधानों के अनुसार प्राथमिकी दर्ज
कराने सहित कठोर वैधानिक कार्रवाई हेतु संस्तुति की जाएगी। उक्त निर्देशों का अनुपालन सर्वाेच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित किया जाए किसी भी प्रकार की शिथिलता, उदासीनता अथवा अनावश्यक विलंब जनहित एव
ं शासन की प्राथमिकताओं के विपरीत माना जाएगा, जिसके लिए संबंधित अधिकारी एवं कार्यदायी संस्था स्वयं उत्तरदायी होगी उन्होंने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व विभाग के कार्यों में किस
ी भी प्रकार की शिथिलता, भ्रष्टाचार, अनावश्यक विलंब, शासनादेशों की अवहेलना अथवा जनहित की उपेक्षा किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं होगी यदि अगली समीक्षा बैठक तक लंबित प्रकरणों के निस्तारण, अतिक्
रमण हटाने, सरकारी भूमि की सुरक्षा एवं मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं से संबंधित कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं पाई जाती है, तो संबंधित उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं लेखपाल का उत
्तरदायित्व निर्धारित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय एवं राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश को तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी तथा विभागीय कार्यवाही, प्रतिकूल प्रविष्टि, निलंबन एवं प्रचलित व
िधिक प्रावधानों के अंतर्गत आवश्यक कठोर कार्रवाई हेतु संस्तुति की जाएगी सभी उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार यह सुनिश्चित करें कि माननीय मुख्यमंती की प्राथमिकताओं, शासन की मंशा एवं जनप्रतिनिधियों द्
वारा उठाए गए जनहित के विषयों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो किसी भी अधिकारी द्वारा लापरवाही, उदासीनता अथवा आदेशों की अवहेलना को गंभीर कदाचार माना जाएगा और उसके विरुद्ध नियमानुसार क
ठोर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।