ललितपुर।
रक्षाबंधन पर्व की पूर्व संध्या पर ललितपुर शहर के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा और धार्मिक भावनाओं के बीच रक्षा सूत्र बांधने का आयोजन किया गया मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार रक्षा सूत्र बांधकर धर्म, साधु-संतों और जीव मात्र की रक्षा का संकल्प लिया-जैन परंपरा में रक्षाबंधन का संबंध केवल भाई-बहन के प्रेम से नहीं बल्कि धर्म और साधु-संस्कृति की रक्षा से भी जोड़ा जाता है जैन मान्यता के अनुसार प्राचीनकाल में हस्तिनापुर में आचार्य अकम्पनाचार्य सहित 700 मुनिराजों के संघ पर घोर उपसर्ग किया गया था।
विभिन्न जैन स्रोतों में इस घटना को रक्षाबंधन पर्व की धार्मिक पृष्ठभूमि बताया गया है।क्या था 700 मुनियों पर उपसर्ग?जैन धार्मिक कथानक के अनुसार आचार्य अकम्पनाचार्य के नेतृत्व में 700 मुनियों का संघ हस्तिनापुर में चातुर्मास कर रहा था।
इसी दौरान राजा बलि से जुड़े मंत्रियों द्वारा मुनियों की साधना में बाधा डालने के लिए भयंकर उपसर्ग किया गया कुछ जैन ग्रंथ-आधारित विवरणों में मुनियों के चारों ओर अग्नि तथा दुर्गंधयुक्त वातावरण उत्पन्न किए जाने का उल्लेख मिलता है।मुनिराजों ने इस संकट के बीच अपनी साधना और संयम नहीं छोड़ा।
कथा के अनुसार जब इस उपसर्ग की जानकारी मुनि विष्णुकुमार को हुई तो उन्होंने अपनी ऋद्धि के प्रभाव से वहां पहुंचकर मुनियों की रक्षा की और उपसर्ग समाप्त कराया।
जैन परंपरा में इसी घटना की स्मृति को रक्षाबंधन पर्व से जोड़ा जाता है।रक्षा सूत्र का धार्मिक महत्वइसी घटना की स्मृति में जैन समाज में रक्षाबंधन के अवसर पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा बताई जाती है।
इसका भाव केवल किसी व्यक्ति की रक्षा तक सीमित नहीं बल्कि धर्म, साधना, संयम, जीव-दया और धार्मिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प माना जाता है।ललितपुर में भी रक्षाबंधन के अवसर पर 700 मुनियों के उपसर्ग निवारण की स्मृति में धार्मिक आयोजन होने का स्थानीय समाचारों में उल्लेख मिलता रहा है।
वर्ष 2024 में भी ललितपुर के जैन समाज द्वारा इसी प्रसंग पर आयोजन कर रक्षा सूत्र बांधे गए थे और मुनि विष्णुकुमार द्वारा 700 मुनियों की रक्षा की कथा सुनाई गई थी।इस वर्ष भी श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व श्रद्धालुओं ने रक्षा सूत्र बांधकर इस धार्मिक प्रसंग को स्मरण किया।
तस्वीरों में मंदिर परिसर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक श्रद्धालुओं की सहभागिता दिखाई दे रही है।जैन समाज के लिए यह पर्व संदेश देता है कि वास्तविक रक्षा केवल शरीर की नहीं बल्कि धर्म, संयम, करुणा और जीव मात्र के प्रति अहिंसा की होनी चाहिए।विशेष: 700 मुनियों और मुनि विष्णुकुमार से जुड़ी घटना जैन धार्मिक परंपरा और कथानक का हिस्सा है।
अलग-अलग जैन स्रोतों में कथा के विवरण और काल-निर्धारण में अंतर मिलता है इसलिए इसे धार्मिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित है।इस दौरान जैन पंचायत के अध्यक्ष अक्षय जैन टडै़या, जैन अटा मंदिर प्रबंधक अजय जैन गंगचारी एवं मनोज जैन बबीना, त्याग वृत्ति संयोजक अमित जैन (उल्ली), आदर्श विवाह संयोजक सजल सजल जैन जौली, जैन अटा मंदिर मैनेजर ऋषभ जैन, प्रबंध समिति संयोजक सुमित खजुरिया, सहित जैन समाज की सभी श्रेष्ठीगण मौजूद रहे..