सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण और श्रीरुद्रमहायज्ञ के तृतीय सावन सोमवार पर 41 लाख शिवलिंगों का निर्माण.

ललितपुर स्थित श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर आयोजित सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं श्रीरुद्रमहायज्ञ के अंतर्गत तृतीय सावन सोमवार को श्रद्धालुओं ने 41लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया इस अवसर पर प्रातःकालीन बेला में श्रीरुद्रमहायज्ञ में पीठ पूजन संपन्न हुआ, जिसे प्रधान यजमान हरीशंकर साहू सहित अन्य यजमानों द्वारा विधि-विधान से किया गया अपराह्न सत्र में पार्थिव शिवलिंगों का पूजन और महारुद्राभिषेक का आयोजन हुआ।

वहीं, श्रीरामकथा महोत्सव के दौरान पोथी पूजन मुख्य यजमान डॉ. अनूप श्रीवास्तव और डॉ. रानी श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

कथाव्यास चंद्रभूषण पाठक के मुखारविंद से दिव्य कथा का वाचन हुआ, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

कथा के दौरान प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।तत्पश्चात महामंडलेश्वर चंडीपीठाधीश्वराचार्य स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए कहा कि शिव के नाम और गुणों की महिमा अनंत व अपार है।

उन्होंने कहा कि शिव ऐसे अव्यक्त और अनंत स्वरूप देवता हैं, जिनके गुणों व शक्तियों की गिनती साधारण मनुष्य के लिए संभव नहीं है।

शास्त्रों के अनुसार, यदि पर्वत जितना काजल लेकर समुद्र जैसी दवात में भरा जाए और कल्पवृक्ष रूपी कलम से पृथ्वी रूपी कागज पर स्वयं ज्ञान की देवी सरस्वती भी शिव के गुणों को लिखना प्रारंभ करें, तो भी उनका वर्णन समाप्त नहीं होगा।स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने 'हर-हर महादेव' के जयकारे के महत्व को समझाते हुए बताया कि 'हर' शब्द का अर्थ हरण करने से है।

शास्त्रों के मुताबिक, शिव का नाम सभी पापों को हर लेता है। मन, बुद्धि, विचार, कर्म और वाणी के सभी दोष शिव के 'हर' नाम के स्मरण से नष्ट हो जाते हैं। यह पवित्र शब्द पाप, दोष और दुर्गुणों पर विजय दिलाने वाला है।

उन्होंने कहा कि शिव नाम की इसी दिव्य शक्ति के कारण उन्हें अन्य देवों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है और वे महादेव के रूप में पूजे जाते हैं।

यही कारण है कि शिव भक्त पापों के नाश और भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए 'हर-हर महादेव' का जयकारा लगाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Surendra Sapera

@saperasurendra50

Reporter Lalitpur Up

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