ललितपुर। मत्स्य पालन क्षेत्र की प्रगति को गति देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना एवं मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की समीक्षा बैठक जिलाधिकारी सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में कैम्प कार्यालय में संपन्न हुई बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, मत्स्य पालकों के आर्थिक सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर विस्तृत चर्चा की गई जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत स्वीकृत सभी प्रोजेक्ट्स, जिनमें नए तालाबों का निर्माण, हैचरी स्थापना और इनपुट सब्सिडी शामिल हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से निष्पक्ष होना चाहिए और यह प्रक्रिया विभागीय ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से तय नियमों के अनुसार ही संचालित की जाए। सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी देरी के भेजी जानी चाहिए। साथ ही, सरकारी और निजी हैचरियों के जरिए मत्स्य पालकों को उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत मछली के बीज समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया, ताकि मछुआरों को मछली के बेहतर चारे, बीमारियों से बचाव और आधुनिक प्रबंधन की जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालकों को पारंपरिक तरीकों के स्थान पर आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सहायक निदेशक मत्स्य ने अवगत कराया कि वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत ऑनलाइन पोर्टल पर कुल 29 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 15 आवेदन पात्र पाए गए, जबकि 14 आवेदन अपात्र रहे। अभिलेखों के आधार पर सत्यापन के बाद पात्र और अपात्र आवेदनों का विवरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे समिति के सदस्यों ने अपनी सहमति प्रदान की।
मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह योजना वर्ष 2022-23 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्राम सभा के उन तालाबों में मत्स्य उत्पादकता को 50 कुन्तल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक बढ़ाना है, जिन्हें मनरेगा कन्वर्जन्स या अन्य माध्यमों से सुधारा गया है। यह योजना उन तालाबों के लिए है जो प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के दायरे में नहीं आते। इस योजना के तहत दो उप-योजनाएं संचालित हैं, जिनमें तालाबों पर प्रथम वर्ष के निवेश और मत्स्य बीज बैंक की स्थापना पर 4 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
विभागीय पोर्टल पर 08 जून 2026 से 28 जून 2026 और 16 जुलाई 2026 से 10 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस दौरान कुल 16 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 12 आवेदनों को योजना का लाभ देने की संस्तुति दी गई है, जबकि 04 आवेदनों को अपात्र मानते हुए चयन न करने की संस्तुति की गई है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी शेषनाथ चौहान, उप कृषि निदेशक अख्तर हुसैन, जिला कृषि अधिकारी रंजीत कुमार, लीड बैंक मैनेजर और सहायक निदेशक मत्स्य सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
ललितपुर। मत्स्य पालन क्षेत्र की प्रगति को गति देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना एवं मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की समीक्षा बैठक जिलाधिकारी सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में कैम्प कार्यालय में संपन्न हुई बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, मत्स्य पालकों के आर्थिक सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर विस्तृत चर्चा की गई जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत स्वीकृत सभी प्रोजेक्ट्स, जिनमें नए तालाबों का निर्माण, हैचरी स्थापना और इनपुट सब्सिडी शामिल हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से निष्पक्ष होना चाहिए और यह प्रक्रिया विभागीय ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से तय नियमों के अनुसार ही संचालित की जाए। सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी देरी के भेजी जानी चाहिए। साथ ही, सरकारी और निजी हैचरियों के जरिए मत्स्य पालकों को उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत मछली के बीज समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया, ताकि मछुआरों को मछली के बेहतर चारे, बीमारियों से बचाव और आधुनिक प्रबंधन की जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालकों को पारंपरिक तरीकों के स्थान पर आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सहायक निदेशक मत्स्य ने अवगत कराया कि वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत ऑनलाइन पोर्टल पर कुल 29 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 15 आवेदन पात्र पाए गए, जबकि 14 आवेदन अपात्र रहे। अभिलेखों के आधार पर सत्यापन के बाद पात्र और अपात्र आवेदनों का विवरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे समिति के सदस्यों ने अपनी सहमति प्रदान की।
मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह योजना वर्ष 2022-23 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्राम सभा के उन तालाबों में मत्स्य उत्पादकता को 50 कुन्तल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक बढ़ाना है, जिन्हें मनरेगा कन्वर्जन्स या अन्य माध्यमों से सुधारा गया है। यह योजना उन तालाबों के लिए है जो प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के दायरे में नहीं आते। इस योजना के तहत दो उप-योजनाएं संचालित हैं, जिनमें तालाबों पर प्रथम वर्ष के निवेश और मत्स्य बीज बैंक की स्थापना पर 4 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
विभागीय पोर्टल पर 08 जून 2026 से 28 जून 2026 और 16 जुलाई 2026 से 10 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस दौरान कुल 16 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 12 आवेदनों को योजना का लाभ देने की संस्तुति दी गई है, जबकि 04 आवेदनों को अपात्र मानते हुए चयन न करने की संस्तुति की गई है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी शेषनाथ चौहान, उप कृषि निदेशक अख्तर हुसैन, जिला कृषि अधिकारी रंजीत कुमार, लीड बैंक मैनेजर और सहायक निदेशक मत्स्य सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।