श्रुत पंचमी महोत्सव के द्वितिय दिन श्री योगसार विधान सम्पन्न
📰 शोभित जैन
<strongविदिशा।</strong>श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा द्वारा श्रुत पंचमी के पावन पर्व पर त्रय दिवसीय धार्मिक आयोजन किया जा रहा है।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि 19 जून 2026, शुक्रवार से 21 जून 2026, रविवार तक श्री चौबीस तीर्थंकर लघु विधान, श्री योगसार लघु विधान एवं श्री द्रव्यसंग्रह विधान का भव्य आयोजन चल रहा है।
पंडित अनुभव शास्त्री करेली द्वारा श्रुत परम्परा का व्यवस्थित विवरण समझाया जिसमें उन्होंने बताया कि श्रुत प्रवाह आदिनाथ से प्रारंभ हुआ। चौथे काल में कई बार ऐसी स्थिति आई जब धर्म और धर्मी दोनों नहीं रहे, पर वर्तमान में जो समागम प्राप्त है उसमें प्रसन्नता का विषय है। केवल ज्ञान की परम्परा श्रीधर केवली तक चली।
उनके बाद श्रुत केवली का युग आया जो 100 वर्ष तक रहा। इस काल में विष्णु, नन्दिमित्र, अपराजित, गोवर्धन और भद्रबाहु जैसे श्रुत केवली हुए जो 11 अंग और 14 पूर्व के ज्ञाता थे। इसके बाद 183 वर्ष तक 11 मुनिराजों को 11 अंग व 10 पूर्व का ज्ञान रहा। फिर अगले 220 वर्षों में क्षत्र, जयपाल, पांडु, ध्रुवसेन और कंस ये 5 मुनिराज 11 अंग के धारी रहे।
इसके बाद 118 वर्षों तक सुभद्र, यशोभद्र, भद्रबाहु और लोहाचार्य ये 4 मुनिराज केवल एक अंग के धारी रहे। इसी काल में आचारांग का भी लोप हो गया। अंत में विनय दत्त, शिव दत्त, श्री दत्त और अर्हद्दत्त केवल अंग के अंशों के ज्ञान के धारी रहे।
इस प्रकार श्रुत लेखन की आवश्यकता पड़ी और आज हमें उसे सहजने की जरूरत है
21 जून को प्रातः 7:30 बजे प्रक्षाल पूजन विधान - दृव्यसंग्रह लघु विधान, 9:00 बजे प्रवचन, रात्रि 8 से 8:30 बजे भक्ति एवं 8:30 बजे प्रवचन होंगे। ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन व समस्त ट्रुस्टियो ने सभी से धर्म लाभ लेने की अपील की।



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