सज्जन पुरुष को देखकर बस उसकी प्रशंसा नहीं करना तुरंत संकल्प करो मुझे उस जैसा वनना है - राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज
हम इन्दौर बासी ऐतिहासिक चातुर्मास कराने के लिए संकल्पित है- आनंद गोधा
शदिशा इन्दौर की ओर है तो उत्साह भी इन्दौर महानगर जैसा दिख रहा है --विजय धुर्रा</em>
📰 अतुल कुमार जैन
शाजापुर । आप तो धर्मात्मा है आप पापी नहीं है पुण्यत्मा के मन में कभी धर्म को देखकर ऐसा भाव आया कि मुझे कुछ भी करना पड़े ये धर्म मेरे पास हमेशा होना चाहिए किसी सज्जन पुरुष को देखा बस उसकी प्रशंसा नहीं करना तुरंत संकल्प करो मुझे कुछ भी करना करना पड़े। ये सज्जनता मेरे पास होना चाहिए किसी धर्मात्मा को मंदिर जाते देखा। बोलो मंदिर जाना अच्छी बात है कि बुरी बात? बस मैं बातों में आने वाला नहीं हूं। यदि कभी तुम्हें सही में अच्छा लगे इसे मंदिर जाते हुए देखकर तो तुम भी मन्दिर चले जाना जैसे धनी पापी को देखकर कैसा भी हो कुछ भी करूंगा ये धन मेरे पास आ जाएं जैसे ही तुमने देखा मंदिर जाने वाले को बस तुमने कहा ये कायश्वर कर रहा हूं ये मंदिर जाना मुझे बहुत पसंद है एक दिन मैं भी मंदिर जाके दिखाऊंगा उक्त आश्य केउद्गार शाजापुर के निकट विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए
-: जो चीज अच्छी लगती हो वह एक दिन मेरे पास हो :-
उन्होंने कहा ये नियम अभिषेक करने वाले को देखकर कभी ना कभी आया कि ये पर्याय मेरे पास कम होगी। ये अभिषेक कर रहा है। बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत अच्छा लग रहा है। जो चीज अच्छी लगती है एक दिन मेरे पास होगी ही चाहिए। बोलो पापी जीव का संकल्प ज्यादा अच्छा है। दृढ़ या तुम्हारा? पापियों ने तो संकल्प कर लिया। ये धन मेरे पास होना चाहिए। तो उसके लिए क्या करेगा वो सब कुछ करेगा रिक्स उठाएगा जितना पापी व्यक्ति अपनी इक्षित वस्तु को पाने के लिए रिक्स उठता है बैसा हम धर्म पाने के लिए करें फिर देखना तुम्हारी प्रगति को पंख लग जायेंगे जैसे रावण अपनी इक्षित वस्तु को पाने के लिए क्या नहीं किया विदेही का अपहरण करना था मर गया युद्ध लड़ लिया एक पापी व्यक्ति अपनी इक्षित वस्तु पाने के लिए मर गया। एक पापी व्यक्ति है कष्ट उठा रहा है सारी लंका झोंक दी। सारा परिवार झोंक दिया।
-: पापियों की संकल्प शक्ति देखो इच्छा शक्ति और संकल्प शक्ति के सामने उसने पूरी लंका झोंक दी :-
उन्होंने कहा कि एक इच्छित वस्तु को पाने के लिए पापी के मन में इतना द संकल्प एक पापी के मन में इतनी इच्छा शक्ति एक पापी के मन की संकल्प शक्ति को देखो महानुभाव थोड़ा सोचा करो पापियों की संकल्प शक्ति देखो इच्छा शक्ति और संकल्प शक्ति के सामने उसने पूरी लंका झोंक दी पूरा परिवार झोंक दिया स्वयं भी मर गया एक पापी का। अब मैं एक इस सभा में से धर्मात्मा चाहता हूं। जो धर्म को चाहता है उसको पाने के लिए वो क्या कर सकता है? उसको पाने के लिए क्या जिंदगी दांव पर लगा सकता है? धर्म की बात कर रहा हूं। पापी की बात पापी ने तो अपनी इच्छित वस्तु पाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। सबको मालूम है इस संसार में कितने पापी है। लेकिन कोई धर्मात्मा बताओ जिसने धर्म को पाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी।
-: कभी धर्म के लिए जिंदगी दव पर लगाने का तुम्हें भाव आया हो :-
उन्होंने कहा कि कभी धर्म के लिए जिंदगी दव पर लगाने का तुम्हें भाव आया हो। ये धर्मात्मा मुझे पसंद है। इसको पाने के लिए मैं जिंदगी दांव पर लगाता हूं। मैं जिंदगी की कमाई दाव पर लगाता हूं। पूरा परिवार दाव पर लगाता हूं। एक धर्मराज युधिष्ठिर ने जुआ खेला। जुए पर क्या-क्या दांव पर लगा दिया? एक बार एक व्यक्ति ने मेरे से प्रश्न किया। बोले महाराज जी आप लोग दीक्षा ले लेते हो। परिवार के लोग दुखी होते हैं। आप सब घर बार छोड़ कुटुंब छोड़ देते हो मैंने कहा कि हां धर्म मुझे पसंद आ गया इसलिए मैंने सब कुछ दाव पर लगा दिया। तो इतना तो नहीं मैंने जब एक पापी एक जुआड़ी बोलो सब कुछ दाव पे क्या लगा दिया? काहे पे लगाया? जुआ। पूरा इंद्रप्रस्थ लगाया कि नहीं? पूरा धन दौलत दांव पर लगाया कि नहीं? भाइयों को दांव पर लगाया कि नहीं? द्रोपदी को भी स्वयं भी तो जब एक पापी पाप के लिए सारी जन्नत दांव पर लगा सकता है तो हमने तो धर्म पे ही सब कुछ दांव पर लगाया है मैं तो धर्म के लिए सब कुछ दांव पे लगा रहा हूं आप लोगों में धन दौलत परिवार सबको दांव पर लगा दिया। सब छोड़ दिया। यह है शक्ति।
-: एक पापी से सीखो इच्छा शक्ति। एक पापी से सीखो संकल्प शक्ति :-
राष्ट्र संत मुनि श्री ने कहा कि एक पापी से सीखो इच्छा शक्ति। एक पापी से सीखो संकल्प शक्ति। कि ऐसा संकल्प यदि धर्मात्मा के मन में जाग जाए। महानुभाव सारे जगत का कल्याणक हो जायेगा आज संसार में पापी जीत रहा है। धर्मात्मा हार
रहा है। दुर्जन जीत रहा है। सज्जन हार दुर्जन हंस रहा है। सज्जन रो रहा है। क्यों? जहां देखो दुर्जनों का बोल बाला है यदि दो दुर्जन हो, दो सज्जन हो बोलो कौन जीतेगा? दुर्जन कारण क्या है? कारण क्या है? दो आतंकवादी 250 लोगों को प्लेन में कैप्चरिंग कर लेते हैं। आतंकवादी कितने हैं? और प्लेन में व्यक्ति कितने हैं? 250। क्या बात है? दो पापियों ने 250 धर्मात्माओं को हैंड्स अप करा दिया। क्या कमी है? क्या दो की ताकत ज्यादा है? नहीं। इच्छा शक्ति और संकल्प शक्ति। वो 250 पाने के लिए मरने को तैयार है। यदि 250 भी कह दे कि मैं किसी को मरने नहीं दूंगा।
-: संसार में धर्मात्मा हार रहा है और अधर्मी जीत रहा है :-
उन्होंने कहा कि धर्म के लिए दो आतंकवादी ऐसे पकड़े जाएंगे 250 एक साथ टूट पड़े लेकिन 250 धर्मात्माओं में संकल्प शक्ति नहीं है और दो आतंकवादियों में संकल्प शक्ति है उनका विल पावर देखो कितना है पापी है वो और हम धर्मात्मा है पापी की इतनी शक्ति के 250 को काबू पा लिया और 250 इतने कमजोर कि हम दो को भी काबू नहीं पाता। बस यह स्थिति इस संसार में होती है। इसलिए संसार में धर्मात्मा हार रहा है और अधर्मी जीत रहा है आपके मन में भी अच्छी बात हार रही है। बुरी बात पनप रही है। आपका मन भी अच्छी बात को ग्रहण नहीं कर पा रहा है। बुरी बात को ग्रहण कर रहा है। क्योंकि आपके पास जो संकल्प शक्ति है और यह चाहत हमें जगाना है


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