बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को स्ववित्त पोषित की जगह 100 % एडिड कराये जाने की रखी मांग
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को भेंट किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय सेल्फ फाइनेन्स संस्था है। इसको यथाशीघ्र
100 प्रतिशत स्व वित्तपोषित से जोड़कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध करायी जाये, जिससे बदहाल एवं बेहाल बुन्देलखण्ड के विद्यार्थी ठीक प्रकार से शिक्षा प्राप्त कर सकें। ज्ञापन में कहा गया कि अति पिछड़े, बदहाल एवं बेहाल क्षेत्र बुन्देलखण्ड में धन अभाव के कारण छात्र-छात्रायें उच्च शिक्षा ग्रहण करने में वंचित रह जा रहे हैं। यदि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को ग्रांट एन्ड ऐड की व्यवस्था करा दी जाये, तो विद्यार्थी ठीक से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे एवं बेहतर नौकरी प्राप्त करने लायक बन सकेंगे। केंद्रीय अध्यक्ष ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने भी इस ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराने के लिए पत्र लिखा था। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाओं को संविदा पर नियुक्त किया गया है। हम यह आग्रह करना चाहते हैं कि अगर शिक्षक, शिक्षिकाओं की नियुक्ति उचित वेतन पर की जाए, तो बेहतर तरीके से छात्र, छात्राओं के भविष्य को संवारने का कार्य कर पायेंगे। बदहाल एवं बेहाल बुन्देलखण्ड के अभिभावकों के पास इतनी धनराशि नहीं होती है कि वे अपने बच्चों को इतनी मंहगी फीस में शिक्षा उपलब्ध करा सकें। ज्ञापन में कहा गया कि अगर बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को स्ववित्त पोषित की जगह एडिड नहीं किया गया, तो इस अन्याय एवं उपेक्षा के विरूद्ध बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा सरकार का विरोध करने के लिए बाध्य होगा, जिसके तहत सामूहिक अनशन एवं सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी। किन्हीं भी परिस्थिति में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में स्टाफ की कमी एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विद्यार्थियों को पैसे के अभाव में शिक्षा प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता है। ज्ञापन भेंट करने वालों में रघुराज शर्मा, गिरजा शंकर राय, अनिल कश्यप, प्रदीप नाथ झा एडवोकेट, सी डी लिटोरिया, साहिदा बेगम, योगेंद्र मिश्रा उर्फ़ टाफीमैन, नरेश वर्मा, उत्कर्ष साहू, प्रभु दयाल कुशवाहा, प्रेम सपेरे, गोलू ठाकुर, ब्रजेश राय, विजय रायकवार, शंकर रायकवार आदि उपस्थित रहे।
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को स्ववित्त पोषित की जगह 100 % एडिड कराये जाने की रखी मांग
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को भेंट किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय सेल्फ फाइनेन्स संस्था है। इसको यथाशीघ्र
100 प्रतिशत स्व वित्तपोषित से जोड़कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध करायी जाये, जिससे बदहाल एवं बेहाल बुन्देलखण्ड के विद्यार्थी ठीक प्रकार से शिक्षा प्राप्त कर सकें। ज्ञापन में कहा गया कि अति पिछड़े, बदहाल एवं बेहाल क्षेत्र बुन्देलखण्ड में धन अभाव के कारण छात्र-छात्रायें उच्च शिक्षा ग्रहण करने में वंचित रह जा रहे हैं। यदि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को ग्रांट एन्ड ऐड की व्यवस्था करा दी जाये, तो विद्यार्थी ठीक से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे एवं बेहतर नौकरी प्राप्त करने लायक बन सकेंगे। केंद्रीय अध्यक्ष ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने भी इस ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराने के लिए पत्र लिखा था। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाओं को संविदा पर नियुक्त किया गया है। हम यह आग्रह करना चाहते हैं कि अगर शिक्षक, शिक्षिकाओं की नियुक्ति उचित वेतन पर की जाए, तो बेहतर तरीके से छात्र, छात्राओं के भविष्य को संवारने का कार्य कर पायेंगे। बदहाल एवं बेहाल बुन्देलखण्ड के अभिभावकों के पास इतनी धनराशि नहीं होती है कि वे अपने बच्चों को इतनी मंहगी फीस में शिक्षा उपलब्ध करा सकें। ज्ञापन में कहा गया कि अगर बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को स्ववित्त पोषित की जगह एडिड नहीं किया गया, तो इस अन्याय एवं उपेक्षा के विरूद्ध बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा सरकार का विरोध करने के लिए बाध्य होगा, जिसके तहत सामूहिक अनशन एवं सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी। किन्हीं भी परिस्थिति में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में स्टाफ की कमी एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विद्यार्थियों को पैसे के अभाव में शिक्षा प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता है। ज्ञापन भेंट करने वालों में रघुराज शर्मा, गिरजा शंकर राय, अनिल कश्यप, प्रदीप नाथ झा एडवोकेट, सी डी लिटोरिया, साहिदा बेगम, योगेंद्र मिश्रा उर्फ़ टाफीमैन, नरेश वर्मा, उत्कर्ष साहू, प्रभु दयाल कुशवाहा, प्रेम सपेरे, गोलू ठाकुर, ब्रजेश राय, विजय रायकवार, शंकर रायकवार आदि उपस्थित रहे।