हिंदी भाषा का संरक्षण और संवर्धन करना हर भारतीय का कर्तव्य: एक सामूहिक जिम्मेदारी

हिंदी का संरक्षण और संवर्धन करना हर भारतीय का कर्तव्य है: डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

झांसी। हिंदी दिवस पखवाड़ा के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन की झांसी इकाई द्वारा भाषा संवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ कल्याण मंत्र के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि हिंदी दिवस केवल एक भाषा का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व में अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश और चीनी जैसी भाषाएं शक्ति का आधार बन रही हैं, तब हिंदी भी विश्व मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है। डॉ. मिश्र ने कहा कि आज हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि रोजगार, तकनीक, पत्रकारिता और संस्कृति की नई संभावनाओं का द्वार बन चुकी है। यह भारतीय पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित कर रही है और तकनीकी प्रगति से इसका भविष्य और भी उज्ज्वल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी का संरक्षण और संवर्धन करना हर भारतीय का कर्तव्य है।

डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने प्रवासी भारतीय समुदाय के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, खाड़ी देशों, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में बसे भारतीयों ने समाचार-पत्र, रेडियो और सांस्कृतिक संस्थाओं के माध्यम से हिंदी की जड़ों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि आज अमेरिका, रूस, जापान, यूरोप और अफ्रीकी देशों के विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के प्रयास भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी राष्ट्रभक्त संगठन एवं हिन्दू समन्वय मंच के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अर्जरिया ने कहा कि आधुनिक समय में भी हिंदी भाषा देश की सांस्कृतिक एकता, आपसी संवाद और पहचान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि हिंदी दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है और यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है।

कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि व्यवसायी एवं समाजसेवी सर्वेश पटेल ने कहा कि भारत के संविधान निर्माताओं ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया था। संविधान के अनुच्छेद 343 में यह स्पष्ट किया गया कि हिंदी देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा होगी। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

मातृभूमि सेवा मिशन मध्य प्रदेश के संयोजक और कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि अशोक शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों की संवाहिका भी है। उन्होंने तुलसी, सूर, कबीर, प्रेमचंद और दिनकर जैसे रचनाकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्होंने हिंदी साहित्य को भारतीय आत्मा से जोड़ा और उसे नैतिकता व राष्ट्रीय चेतना का स्वर दिया।

कार्यक्रम का संचालन समाजसेविका श्रीमती ऊषा सचान ने किया, जबकि आभार ज्ञापन समाजसेविका श्रीमती मीनू सोनी ने किया। श्रीमती ऊषा सचान एवं श्रीमती मीनू सोनी ने मुख्य अतिथि डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र का पुष्पमाला, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर मातृभूमि सेवा मिशन के देहरादून, उत्तराखंड इकाई के संयोजक दिनेश छारी एवं कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. रामकुमार गुप्ता सहित अनेक हिंदी प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।

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Archana Shriwas

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