इंदौर में जल संकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है पूर्व शहर कांग्रेस कमेटी महामंत्री राजेश जैन दद्दू ने शहर में व्याप्त जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए नगर निगम और शासन को चेतावनी दी है। दद्दू ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि 28 वर्षों तक नगर निगम और प्रदेश में शासन के बावजूद, प्रदेश को सबसे अधिक टैक्स देने वाले इंदौर शहर के नागरिकों को दो दिन में केवल एक बार मात्र 30 मिनट पानी मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना के तीन चरण पूरे होने के बावजूद वास्तविकता यह है कि आर्थिक राजधानी की 40 प्रतिशत आबादी आज भी पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर है और शहर के तालाब खाली पड़े हैं।
राजेश जैन दद्दू ने भविष्य के संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि जनवरी के बाद स्थिति और अधिक विकट हो जाएगी। उन्होंने आशंका जताई कि तब आधे से अधिक बोरिंग सूख जाएंगे और तालाबों से भी पानी मिलना बंद हो जाएगा। उन्होंने उज्जैन और देवास को पानी पहुंचाने वाली लाइन से यशवंत सागर में पानी डालने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मात्र इससे शहर की आवश्यकता पूरी हो पाएगी और फिर उन शहरों का क्या होगा?
दद्दू ने कहा कि अभी भी 5 से 6 माह का समय शेष है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बाद में हाहाकार की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने जनहित में मांग की है कि नर्मदा परियोजना के एक या दो चरण बड़ी कंपनियों को ठेका देकर अगले 5 माह में पूरे किए जाएं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेट्रो परियोजना पर इतना खर्च किया जा सकता है, तो जल संकट के समाधान के लिए संसाधन क्यों नहीं जुटाए जा रहे?
उन्होंने शहर के 9 विधायकों, पार्षदों, सांसद और सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे समय रहते इस ओर ध्यान दें ताकि शहर की जनता को आसन्न भयंकर संकट से राहत दिलाई जा सके।
इंदौर में जल संकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है पूर्व शहर कांग्रेस कमेटी महामंत्री राजेश जैन दद्दू ने शहर में व्याप्त जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए नगर निगम और शासन को चेतावनी दी है। दद्दू ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि 28 वर्षों तक नगर निगम और प्रदेश में शासन के बावजूद, प्रदेश को सबसे अधिक टैक्स देने वाले इंदौर शहर के नागरिकों को दो दिन में केवल एक बार मात्र 30 मिनट पानी मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना के तीन चरण पूरे होने के बावजूद वास्तविकता यह है कि आर्थिक राजधानी की 40 प्रतिशत आबादी आज भी पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर है और शहर के तालाब खाली पड़े हैं।
राजेश जैन दद्दू ने भविष्य के संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि जनवरी के बाद स्थिति और अधिक विकट हो जाएगी। उन्होंने आशंका जताई कि तब आधे से अधिक बोरिंग सूख जाएंगे और तालाबों से भी पानी मिलना बंद हो जाएगा। उन्होंने उज्जैन और देवास को पानी पहुंचाने वाली लाइन से यशवंत सागर में पानी डालने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मात्र इससे शहर की आवश्यकता पूरी हो पाएगी और फिर उन शहरों का क्या होगा?
दद्दू ने कहा कि अभी भी 5 से 6 माह का समय शेष है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बाद में हाहाकार की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने जनहित में मांग की है कि नर्मदा परियोजना के एक या दो चरण बड़ी कंपनियों को ठेका देकर अगले 5 माह में पूरे किए जाएं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेट्रो परियोजना पर इतना खर्च किया जा सकता है, तो जल संकट के समाधान के लिए संसाधन क्यों नहीं जुटाए जा रहे?
उन्होंने शहर के 9 विधायकों, पार्षदों, सांसद और सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे समय रहते इस ओर ध्यान दें ताकि शहर की जनता को आसन्न भयंकर संकट से राहत दिलाई जा सके।