विदिशा के श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में पर्युषण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म का आयोजन
विदिशा। श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे दसलक्षण धर्म विधान और पर्युषण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
प्रवक्ता डॉ. मक्खन लाल जैन ने बताया कि मुंबई से पधारे पंडित संयम शास्त्री द्वारा समयसार नाटक ग्रंथ पर स्वाध्याय कराया जा रहा है। स्वाध्याय के दौरान पंडित जी ने उत्तम तप धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दशलक्षण में आज उत्तम तप का दिन है और नाटक समयसार में 11वां छंद चल रहा है। उन्होंने पं. दौलतराम जी के संदर्भ में समझाया कि भेद-विज्ञान के बिना जीव ने अनंत बार तप किया है और वह अंतिम ग्रैवेयक तक गया, लेकिन सब शून्य रहा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चेक पर केवल शून्य लिखे होने और आगे एक का अंक न होने पर उसकी कीमत कुछ नहीं होती, वैसे ही भेद-विज्ञान के बिना 12 प्रकार के तप, उपवास और स्वाध्याय शून्य हैं।
पंडित संयम शास्त्री ने कहा कि उपवास और कायाक्लेश शरीर की क्रियाएं हैं, जो जड़ हैं। जड़ की क्रिया से चेतन आत्मा का धर्म नहीं हो सकता। उन्होंने भेद-विज्ञान को संसार रूपी रोग की सबसे बड़ी दवा बताते हुए कहा कि आत्मा और शरीर को अलग करना ही भेद-विज्ञान है। उन्होंने कहा कि शरीर, धन और परिवार मेहमान के समान हैं और जिस वस्तु में अपनापन माना जाता है, वहीं दुःख का कारण है।
सायंकालीन प्रवचन में पंडित संयम शास्त्री ने उत्तम तप धर्म को आत्मा की शुद्धि का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि तप दो प्रकार के होते हैं—बाहर का और भीतर का। बाहर का तप भूखा रहना, कम खाना और स्वाद का त्याग करना है, जबकि भीतर का तप विनम्र बनना, अपनी गलतियों को स्वीकार करना, सेवा, स्वाध्याय और ध्यान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शरीर को सुखाना तप नहीं है; यदि उपवास के बाद मन में अहंकार आ जाए, तो वह तप व्यर्थ है। सच्चा तप वही है जो इच्छाओं को शांत करे और कर्मों की निर्जरा करे।
कार्यक्रम के दौरान सायंकालीन वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों द्वारा जैन धर्म के प्रसिद्ध विद्वान गोपाल दास जी बरैया के जीवन पर आधारित एक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें बच्चों ने धर्म की कठिन बातों को सरल तरीके से प्रदर्शित किया। ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन ने अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। आज रात्रि में 'जीवन यात्रा संसार से मोक्षमार्ग तक' विषय पर लघु नृत्य नाटिका का मंचन किया जाएगा।


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