कुर्सी के पास कुर्सी लगाकर जमाता था रौब, शिक्षकों से बदसलूकी और दफ्तर में शराब पीने के आरोप; डीईओ ने किया निलंबित
📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना। विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भृत्य के पद पर पदस्थ विजयपाल लोधी पर गंभीर अनियमितताओं और अनुशासनहीनता के आरोप लगे हैं। आरोप है कि अधिकारी की गैरमौजूदगी में वह उनकी कुर्सी के पास अपनी कुर्सी लगाकर बैठता था और कार्यालय आने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों पर रौब झाड़ता था। मामला तब गंभीर हो गया, जब उस पर अधिकारी की सील का इस्तेमाल कर शैक्षणिक दस्तावेजों पर स्वयं हस्ताक्षर करने के आरोप सामने आए। शिकायतों और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने विजयपाल लोधी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
-: शिक्षकों-कर्मचारियों से बदसलूकी का आरोप :-
विकासखंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में विजयपाल लोधी पर कार्यालयीन कार्य में बाधा डालने और कार्यालय आने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वह कर्मचारियों को भड़काने का काम करता था। इसके अलावा कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद दफ्तर में शराब पीने की शिकायत भी सामने आई है।
-: अधिकारी की सील लगाकर दस्तावेजों पर खुद हस्ताक्षर करने का आरोप :-
मामले का सबसे गंभीर पहलू शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़ा है। तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा मई 2026 में भेजी गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि विजयपाल लोधी ने बिना अनुमति और अधिकारी की जानकारी के शाला त्याग प्रमाणपत्र एवं मूल टीसी पर अधिकारी की सील लगाकर स्वयं हस्ताक्षर किए। इसके बाद इन दस्तावेजों को प्रमाणित किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
इस मामले को लेकर जिला शिक्षा कार्यालय ने 13 मई 2026 को विजयपाल लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
-: प्रथम दृष्टया दोषी मानकर निलंबन :-
विभागीय रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने विजयपाल लोधी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि में विजयपाल लोधी का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नरवर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
-: ‘सील-हस्ताक्षर’ तक पहुंच कैसे मिली? :-
कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक भृत्य को अधिकारी की सील और महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेजों तक इतनी पहुंच कैसे मिली। अब देखना होगा कि विभागीय कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहती है या फिर अधिकारी की सील के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के पूरे मामले की भी विस्तृत जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है।
कुर्सी के पास कुर्सी लगाकर जमाता था रौब, शिक्षकों से बदसलूकी और दफ्तर में शराब पीने के आरोप; डीईओ ने किया निलंबित
📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना। विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भृत्य के पद पर पदस्थ विजयपाल लोधी पर गंभीर अनियमितताओं और अनुशासनहीनता के आरोप लगे हैं। आरोप है कि अधिकारी की गैरमौजूदगी में वह उनकी कुर्सी के पास अपनी कुर्सी लगाकर बैठता था और कार्यालय आने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों पर रौब झाड़ता था। मामला तब गंभीर हो गया, जब उस पर अधिकारी की सील का इस्तेमाल कर शैक्षणिक दस्तावेजों पर स्वयं हस्ताक्षर करने के आरोप सामने आए। शिकायतों और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने विजयपाल लोधी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
-: शिक्षकों-कर्मचारियों से बदसलूकी का आरोप :-
विकासखंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में विजयपाल लोधी पर कार्यालयीन कार्य में बाधा डालने और कार्यालय आने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वह कर्मचारियों को भड़काने का काम करता था। इसके अलावा कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद दफ्तर में शराब पीने की शिकायत भी सामने आई है।
-: अधिकारी की सील लगाकर दस्तावेजों पर खुद हस्ताक्षर करने का आरोप :-
मामले का सबसे गंभीर पहलू शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़ा है। तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा मई 2026 में भेजी गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि विजयपाल लोधी ने बिना अनुमति और अधिकारी की जानकारी के शाला त्याग प्रमाणपत्र एवं मूल टीसी पर अधिकारी की सील लगाकर स्वयं हस्ताक्षर किए। इसके बाद इन दस्तावेजों को प्रमाणित किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
इस मामले को लेकर जिला शिक्षा कार्यालय ने 13 मई 2026 को विजयपाल लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
-: प्रथम दृष्टया दोषी मानकर निलंबन :-
विभागीय रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने विजयपाल लोधी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि में विजयपाल लोधी का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नरवर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
-: ‘सील-हस्ताक्षर’ तक पहुंच कैसे मिली? :-
कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक भृत्य को अधिकारी की सील और महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेजों तक इतनी पहुंच कैसे मिली। अब देखना होगा कि विभागीय कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहती है या फिर अधिकारी की सील के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के पूरे मामले की भी विस्तृत जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है।