एक ही टिप्पणी से निराकृत हो रहे आरटीआई आवेदन,साडा कॉलोनी के रिकॉर्ड पर बढ़े सवाल, वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग,चंदेरी के मामलों में प्रदेश सहित राज्य सूचना आयोग ले स्वत: संज्ञान

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चर्चित चंदेरी- नगर पालिका परिषद चंदेरी में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत मांगी जा रही सूचनाओं के निराकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों से सामने आया है कि विभिन्न आरटीआई आवेदनों में लगभग एक जैसी टिप्पणी लिखकर जानकारी देने से इनकार किया जा रहा है कि *"मांगी गई जानकारी विशिष्ट प्रकृति की न होकर सामान्य एवं विस्तृत प्रकृति की है, इसलिए वांछित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।"*
आरटीआई आवेदक रूपेश घावरी, सीताराम अहिरवार एवं निर्मल विश्वकर्मा ने साडा (विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) कॉलोनी के भूखंडों के आवंटन, पंजीयन, नामांतरण, बैंक खातों में जमा राशि, वित्तीय अभिलेखों एवं संबंधित शासकीय रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। आरोप है कि रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के बजाय एक जैसे जवाब देकर आवेदकों को प्रथम एवं द्वितीय अपील करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
आवेदकों का कहना है कि जब मांगी गई जानकारी शासकीय अभिलेखों में उपलब्ध है, तब उसकी प्रमाणित प्रतियां देने के बजाय एक समान प्रारूप में उत्तर देना सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है। उनका आरोप है कि इससे यह संदेश जाता है कि न तो अधिनियम के प्रावधानों का भय है और न ही वैधानिक कार्रवाई का।

मामला केवल सूचना तक सीमित नहीं है। आवेदकों का दावा है कि साडा कॉलोनी के भूखंडों के आवंटन और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन में संभावित अनियमितताओं की आशंका के कारण ही अभिलेख मांगे गए थे। उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए जाते, तो शासकीय भूमि के बड़े स्तर पर बंदरबांट एवं वित्तीय अनियमितताओं की आशंकाओं की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।

अब तक नियमानुसार कितने आवेदनों का हुआ निराकरण

अब मांग उठ रही है कि यह जांच कराई जाए कि नगर पालिका परिषद चंदेरी में अब तक कितने आरटीआई आवेदनों का निराकरण इसी प्रकार की एक जैसी टिप्पणी लिखकर किया गया है, तथा क्या यह प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से सूचना उपलब्ध कराने से बचने के लिए अपनाई जा रही है।
आवेदकों ने मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अभिलेख सार्वजनिक किए जाते हैं तो साडा कॉलोनी के भूखंड आवंटन और उससे जुड़े वित्तीय मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

एक ही टिप्पणी से निराकृत हो रहे आरटीआई आवेदन,साडा कॉलोनी के रिकॉर्ड पर बढ़े सवाल, वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग,चंदेरी

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