विदिशा के शीतलधाम में मुनि श्री निर्णय सागर महाराज एवं क्षुल्लक श्री तत्व सागर महाराज ससंघ के चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का आयोजन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों श्रद्धालु, युवक-युवतियां और धर्मानुरागी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य गुरुदेव की संगीतमय पूजन के साथ हुआ। भगवान शीतलनाथ के गर्भ, जन्म, तप और कैवल्य ज्ञान की भूमि पर आयोजित इस शीतल वर्षायोग के अवसर पर प्रातःकाल बर्रो वाले बाबा आदिनाथ भगवान के दिव्य दरबार में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और चातुर्मास स्थापना से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। शांतिधारा करने का सौभाग्य आईएएस राहुल जैन को प्राप्त हुआ, जो क्षुल्लक श्री तत्व सागर जी के गृहस्थ आश्रम के पिताश्री हैं।
इस अवसर पर विदिशा विधायक मुकेश टंडन, पूर्व विधायिका श्रीमती लीना जैन और डीएसपी मयंक जैन सहित कई राजनीतिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मुनि श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित किए। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' एवं अशोक सिंघई 'गुड्डू' ने बताया कि ललितपुर से आए प्रतिष्ठाचार्य मनोज भैया ने मंगलाचरण के साथ आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज एवं वर्तमान आचार्य समय सागर महाराज की जयकारों के साथ भक्तिपूर्ण वातावरण का निर्माण किया।
समारोह में चातुर्मास 2026 के लिए पांच मंगल कलश स्थापित किए गए, जो तीन किलो शुद्ध चांदी से निर्मित हैं। इन कलशों को स्थापित करने का सौभाग्य सुमेर चंद, पं. महेंद्र जैन विस्कुट एवं अन्य परिवारों को प्राप्त हुआ। इस दौरान मंदसौर, सागर, जबलपुर, गाडरवारा, गोटेगांव, कटनी, रतलाम, केमोर, पहाड़ी, गंजबासौदा, अशोकनगर, आरोन, भोपाल, बैरसिया, सिरोंज, लटेरी, मुरारिया, मुरबास, नेमावर, कन्नौद, बालाघाट, ललितपुर, वैकुंठपुर, भानपुर और मंडीदीप सहित विदिशा नगर से आए श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। चातुर्मास कमेटी द्वारा सभी पुण्यार्जक परिवारों का स्वागत किया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री निर्णय सागर महाराज ने कहा कि जैन परंपरा में चातुर्मास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए दिगंबर मुनिराज एक स्थान पर रहकर साधना, स्वाध्याय और तप करते हैं। यह काल गृहस्थों के लिए भी आत्मचिंतन और संयम का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण है। मुनि श्री ने समता और संयम को धर्म का मूल बताते हुए कहा कि सच्चा साधक उपसर्ग और सेवा दोनों स्थितियों में समान भाव रखता है।
मुनि श्री ने शीतलधाम में निर्माणाधीन भव्य 'समवसरण' के लिए समाज से सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि इसमें दिया गया योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज, श्री शीतल विहार न्यास ट्रस्ट के पदाधिकारी, चातुर्मास कमेटी, विद्यासागर नवयुवक मंडल, मुनि सेवक संघ, समग्र पाठशाला एवं महिला मंडल की शिक्षिकाएं और बच्चे उपस्थित रहे।


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