पुष्पगिरी तीर्थ में आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज का प्रवचन: जीवन में सफलता के लिए संस्कार और संयम जरूरीऔरंगाबाद/पुष्पगिरी (सोनकच्छ): पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज एवं उपाध्याय श्री पीयूष सागर महाराज ससंघ वर्षायोग हेतु विराजमान हैं।
तीर्थ क्षेत्र पर आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए जीवन में संस्कारों और नैतिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला।आचार्य श्री ने कहा कि जीवन की बड़ी सीख अक्सर बड़े उपदेशों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं से प्राप्त होती है।
उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में इतना संघर्ष और सक्षम बनें कि यदि कभी बच्चे असफल हों, तो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किसी दूसरे बच्चे का उदाहरण न देना पड़े।आचार्य श्री ने राष्ट्र और समाज के संदर्भ में कहा कि कोई भी देश अपने बच्चों की असफलता से नहीं गिरता, बल्कि राष्ट्र तब असफल होता है जब नई पीढ़ी अपने नैतिक, व्यावहारिक और धार्मिक सदाचार के मूल्यों को खो देती है।
उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि यदि कोई युवा यह सोचता है कि दुर्व्यवहार, दुराचार, अपशब्दों या नफरत फैलाकर सफलता के शिखर पर पहुंचा जा सकता है, तो यह घर-परिवार और शिक्षा-संस्कारों की सबसे बड़ी विफलता है।आचार्य श्री ने बच्चों को भारतीय संस्कृति के संस्कारों से अवगत कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को नष्ट होती नैतिकता, गुम होते आदर्शों, लुप्त होती मानव सेवा और आगम साहित्य की परंपराओं का पाठ पढ़ाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन की सफलता क्रोध की ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि चरित्र और संयम के शिखर पर पहुंचने में निहित है।सफलता के सूत्र बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि बच्चों के मन में तीन बातें बिठाएं—ऊंची सोच, कड़ी मेहनत और पक्का इरादा।
साथ ही, जीवन में निरंतर बने रहने के लिए उन्होंने तीन मंत्र दिए—थोड़ा सुनना सीखें, थोड़ा सहना सीखें और थोड़ा झुकना सीखें।
इन गुणों को अपनाकर दुनिया को मुट्ठी में किया जा सकता है।इस जानकारी की पुष्टि प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा और पीयूष कासलीवाल (औरंगाबाद) ने की है।