सेवानिवृत्ति को बनाया सेवा का उत्सव: शिक्षिका सरोज गुप्ता ने विद्यालय को ₹30 हजार का झूला किया समर्पित

भावुक विदाई समारोह में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहयोग का दिया प्रेरक संदेश<&#47;strong>


📰 अतुल कुमार जैन
बामौर कलां। अक्सर सेवानिवृत्ति समारोह केवल सम्मान और विदाई तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन जन शिक्षा केंद्र बामौर कलां अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय चौकाखेड़ा में आयोजित वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती सरोज गुप्ता (बुआ जी) का सेवानिवृत्ति समारोह सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का ऐसा उदाहरण बन गया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। लगभग तीन दशक से अधिक समय तक शिक्षा की अलख जगाने वाली शिक्षिका ने अपने सेवानिवृत्ति दिवस को बच्चों के भविष्य के नाम समर्पित करते हुए विद्यालय को लगभग 30 हजार रुपये की लागत का आकर्षक झूला भेंट किया।

विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में शिक्षकों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों एवं ग्रामीणों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह भावुक पलों के साथ-साथ प्रेरणादायी संदेशों का भी साक्षी बना।

-: भतीजे की पहल से बनी यादगार विदाई :-

कार्यक्रम को विशेष बनाने की शुरुआत श्रीमती सरोज गुप्ता के भतीजे ने की। उन्होंने जन शिक्षक अनिल शर्मा के माध्यम से बीआरसीसी संजय भदौरिया से आग्रह किया कि बुआ जी की विदाई ऐसी हो, जो वर्षों तक लोगों को उनकी सेवाओं की याद दिलाती रहे। इस पर बीआरसीसी संजय भदौरिया ने सुझाव दिया कि विद्यालय के बच्चों के लिए कोई स्थायी एवं उपयोगी सामग्री भेंट की जाए, जिससे उनकी सेवा की स्मृति सदैव जीवित रहे।

इस सुझाव को सहर्ष स्वीकार करते हुए श्रीमती सरोज गुप्ता ने विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों के लिए लगभग ₹30 हजार की लागत का आकर्षक झूला विद्यालय को समर्पित कर दिया। झूले का लोकार्पण अतिथियों एवं बच्चों की उपस्थिति में किया गया। बच्चों के चेहरे पर झूला पाकर जो खुशी दिखाई दी, उसने पूरे समारोह को भावुक और यादगार बना दिया।

-: "सरकारी विद्यालय समाज की साझा जिम्मेदारी":-

समारोह को संबोधित करते हुए बीआरसी संजय भदौरिया ने कहा कि सरकारी विद्यालय केवल शासन के नहीं बल्कि पूरे समाज के हैं। समाज के सकारात्मक सहयोग से विद्यालयों का विकास और बेहतर तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खनियाधाना विकासखंड में समय-समय पर समाजसेवी एवं दानदाता सरकारी विद्यालयों के लिए आगे आते रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने श्रीमती सरोज गुप्ता की इस पहल को अन्य शिक्षकों एवं समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

-: कर्तव्यनिष्ठ शिक्षिका के योगदान को किया याद :-

समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने श्रीमती सरोज गुप्ता के लंबे शिक्षकीय जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का भी विकास किया। वक्ताओं ने कहा कि किसी शिक्षक की पहचान केवल उसकी सेवा अवधि से नहीं, बल्कि समाज और विद्यार्थियों के जीवन पर छोड़ी गई सकारात्मक छाप से होती है। सरोज गुप्ता ने अपने सेवाकाल में यही पहचान बनाई है।

-: अधिकारियों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने किया सम्मान :-

समारोह में संकुल प्राचार्य सुरेंद्र सिंह यादव, जन शिक्षा केंद्र प्रभारी मुकेश तिवारी, मुकेश पटेरिया, जगदीश महते, कीर्ति जैन,राजेश तिवारी,राजेश शर्मा,हरिकृष्ण स्वर्णकार, धनीराम जाटव, अनिल शर्मा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, जन शिक्षक, जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पुष्पमालाओं, शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर श्रीमती सरोज गुप्ता को सम्मानित किया तथा उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

-: सेवानिवृत्ति नहीं, सेवा का नया अध्याय :-

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कहा कि श्रीमती सरोज गुप्ता ने अपनी सेवानिवृत्ति को केवल विदाई तक सीमित न रखकर उसे सेवा के उत्सव में बदल दिया है। विद्यालय को झूला भेंट कर उन्होंने यह संदेश दिया कि शिक्षक का रिश्ता विद्यार्थियों से सेवा अवधि समाप्त होने के बाद भी बना रहता है। उनकी यह पहल आने वाले समय में अन्य शिक्षकों, समाजसेवियों और नागरिकों को भी सरकारी विद्यालयों के विकास में सहयोग के लिए प्रेरित करेगी। यही कारण है कि चौकाखेड़ा का यह सेवानिवृत्ति समारोह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

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ATUL JAIN

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