ललितपुर नगर के जैन अटाजी मंदिर में में सिद्धों की महाआराधना का भव्य आयोजन, श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ में परम पूज्य मुनि श्री विशद सागर जी महाराज एवं मुनि श्री शिवसागर महाराज जी के संसघ सानिध्य में उमडा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब.रिपोर्ट: मनोज जैन अक्षय अलया ललितपुर लाइव टीवी.

शबुंदेलखंड की धार्मिक नगरी ललितपुर में जैन धर्म की भक्ति, साधना और आध्यात्मिक परंपरा को समर्पित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर जी में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन चल रहा है दिनांक 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में सिद्धों की महाआराधना के साथ विश्वशांति, जनकल्याण और धर्म प्रभावना का संदेश दिया जाएगा।
*आयोजन का धार्मिक महत्व:*

जैन धर्म में सिद्धचक्र महामंडल विधान का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है यह विधान आत्मशुद्धि, संयम, साधना और मोक्षमार्ग की भावना से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों में पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से आध्यात्मिक शांति तथा मंगलकामना करते हैं।
ललितपुर में आयोजित होने वाला यह विधान जैन समाज की धार्मिक आस्था और परंपराओं को समर्पित है। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य धर्म आराधना के साथ विश्व में शांति, सद्भाव और सभी जीवों के कल्याण की भावना को मजबूत करना है।
वीओ-2: 14 से 21 अक्टूबर तक धार्मिक कार्यक्रम
आयोजन के आमंत्रण पत्र के अनुसार धार्मिक कार्यक्रम 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित हैं। इस दौरान विधान, पूजन, धार्मिक अनुष्ठान और विश्वशांति महायज्ञ से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।
आमंत्रण पत्र में प्रातःकालीन धार्मिक क्रियाओं, पूजन-विधान और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है। श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की गई है।
वीओ-3: साधु-संतों का मंगल आशीर्वाद
इस धार्मिक आयोजन में जैन साधु-संतों के मंगल आशीर्वाद का विशेष महत्व रहेगा। आमंत्रण पत्र में विभिन्न जैन मुनियों और आचार्यों के नामों का उल्लेख किया गया है। उनके सान्निध्य और मार्गदर्शन में होने वाली धार्मिक आराधना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का माध्यम बनेगी।
जैन परंपरा में साधु-संतों के उपदेशों के माध्यम से अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और आत्मकल्याण जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाती है।
वीओ-4: सौभाग्यशाली महापात्र परिवारों की सहभागिता
आयोजन के आमंत्रण पत्र में सौभाग्यशाली महापात्र परिवारों का भी उल्लेख किया गया है। विभिन्न परिवारों को धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता का अवसर प्रदान किया गया है। इससे समाज में धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सामूहिक सहभागिता की भावना को प्रोत्साहन मिलता है।
इस प्रकार के आयोजन परिवारों और समाज को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वीओ-5: सराफ परिवार ललितपुर बना विधान पुण्यार्जक
आमंत्रण पत्र के अनुसार इस भव्य धार्मिक आयोजन के विधान पुण्यार्जक सराफ परिवार, ललितपुर हैं। आयोजन में सहयोगी संस्थाओं और समाज के विभिन्न सदस्यों का भी योगदान उल्लेखित है।
धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन में समाज के लोगों की सहभागिता से सामूहिक सहयोग, सेवा और धार्मिक एकजुटता की भावना मजबूत होती है।
वीओ-6: विश्वशांति और जनकल्याण का संदेश
सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि शांति, करुणा, अहिंसा और सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाने का भी अवसर है। जैन धर्म की शिक्षाएं सभी जीवों के प्रति दया, संयमित जीवन और परस्पर सम्मान का संदेश देती हैं।
आयोजन के माध्यम से श्रद्धालु विश्व में सुख-शांति, समाज में सद्भाव और सभी के मंगल की कामना करेंगे।
एंकर आउट्रो:
कुल मिलाकर, ललितपुर में आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं और सामूहिक धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण अवसर है। 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धालुओं को धर्म आराधना और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
ललितपुर से रिपोर्ट, ललितपुर लाइव टीवी।
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MANOJ JAIN

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