नौकरी बचाने की मांग को लेकर शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

राज्य कर्मचारी संघ ने कार्यरत शिक्षकों पर पूर्वव्यापी प्रभाव से टीईटी (TET) परीक्षा थोपे जाने के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) को ज्ञापन सौंपा है। चंदेरी में सौंपे गए इस ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने सरकार के इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है।

शिक्षकों का कहना है कि यह नियम देश भर के 25 लाख कार्यरत शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने के लिए दोबारा परीक्षा देने पर मजबूर कर रहा है। इस निर्णय से मध्य प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों के अनुसार, भारत सरकार की 'निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (द्वितीय संशोधन) नियमावली 2017' की धारा 23 की उपधारा (2) के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस नियम के तहत शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में पूर्वव्यापी प्रभाव से टीईटी लागू की गई है।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि जो शिक्षक यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाएंगे, उन्हें 31 अगस्त 2028 के बाद सेवा से हटा दिया जाएगा। शिक्षकों ने तर्क दिया कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब भर्ती के लिए निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी की गई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके द्वारा पढ़ाए गए हजारों छात्र आज डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और अधिकारी बन चुके हैं, तो क्या उनकी शैक्षणिक योग्यता की भी दोबारा परीक्षा ली जाएगी?

शिक्षकों का कहना है कि संविधान सभी को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जिसमें आजीविका का अधिकार भी शामिल है। उन्होंने इस नियम को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

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