गैराहा गांव में नेटवर्क की समस्या से ग्रामीण परेशान, मोबाइल हाथ में लेकर किया प्रदर्शन

21वीं सदी में भी जिओ-एयरटेल के नेटवर्क को तरस रहे ग्रामीण, 112 और 108 जैसी आपात सेवाओं के लिए भी बढ़ी परेशानीमऊरानीपुर/बंगरा।जहां आज दुनिया चांद और मंगल तक पहुंच चुकी है, वहीं झांसी जिले के मऊरानीपुर तहसील अंतर्गत बंगरा ब्लॉक के गैराहा गांव में ग्रामीण आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझ रहे हैं।

गांव में जिओ और एयरटेल जैसी प्रमुख कंपनियों के नेटवर्क की स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को कॉल करने के लिए घरों से निकलकर ऊंचे स्थानों का सहारा लेना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जिओ और एयरटेल की सिम ले रखी हैं और हर महीने नियमित रूप से रिचार्ज भी कराते हैं, लेकिन गांव में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण मोबाइल सेवा का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है।

घर के अंदर तो नेटवर्क लगभग गायब रहता है और कभी-कभार छत या किसी ऊंचे स्थान पर पहुंचने के बाद ही मोबाइल में एक-दो सिग्नल दिखाई देते हैं।आपातकाल में बढ़ जाती है मुसीबतनेटवर्क की समस्या केवल बातचीत या इंटरनेट तक सीमित नहीं है।

ग्रामीणों के मुताबिक किसी आकस्मिक घटना के दौरान 112 पुलिस सेवा या 108 एंबुलेंस को फोन करना भी मुश्किल हो जाता है। जरूरत के समय गांव से बाहर या किसी ऊंचे स्थान पर जाकर नेटवर्क तलाशना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में कुछ मिनट भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, ऐसे में नेटवर्क की यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।मोबाइल हाथ में लेकर किया प्रदर्शननेटवर्क समस्या से परेशान दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने एकजुट होकर मोबाइल फोन हाथ में लेकर प्रदर्शन किया और संबंधित मोबाइल कंपनियों से गांव में बेहतर नेटवर्क उपलब्ध कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कंपनियां नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं तो उनसे लगातार रिचार्ज के नाम पर पैसे क्यों लिए जा रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि खराब नेटवर्क के कारण उनका रिचार्ज भी कई बार बेकार चला जाता है और मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल तक नहीं हो पाता।बच्चों की पढ़ाई से लेकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावितग्रामीण अरविंद सिंह मुखिया ने बताया कि नेटवर्क की समस्या का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

ऑनलाइन पढ़ाई, जरूरी जानकारी और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने में विद्यार्थियों को परेशानी होती है।

वहीं स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में भी ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुशीला देवी ने बताया कि प्रसव जैसी आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस को सूचना देने के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है।

कई बार बड़ी मुश्किल से फोन लग पाता है।

ऐसे में मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा दिलाने में परेशानी होती है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव के युवाओं के मोबाइल में 5G सेवा का लाभ मिलना तो दूर, सामान्य मोबाइल नेटवर्क तक ठीक से उपलब्ध नहीं है।

इसके बावजूद हर महीने रिचार्ज कराया जा रहा है।ग्रामीणों ने प्रशासन और मोबाइल नेटवर्क कंपनियों से गैराहा गांव में जल्द से जल्द मोबाइल टावर अथवा प्रभावी नेटवर्क व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि गांव के लोगों को संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के लिए नेटवर्क की तलाश में इधर-उधर न भटकना पड़े।इस दौरान अरविंद सिंह मुखिया, मानवेंद्र सिंह, सुशीला देवी, पृथ्वीराज सिंह, पिंटू सिंह, अर्जुन सिंह, हरेंद्र कुशवाहा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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Archana Shriwas

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Senior Reporter Mauranipur

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