60 से ज्यादा लोग हिरासत में, फर्जी वर्दी व सायरन से शिकार को डराते थे लोगों को.
झांसी के तीन गांवों में चल रहे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने शुक्रवार रात मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव में एक साथ छापेमारी की। 60 से ज्यादा महिलाओं और पुरुषों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, ठगों ने थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक के फर्जी सेटअप बना रखे थे। मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, राउटर, पुलिस सायरन समेत साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला है। पकड़े गए लोगों से कटेरा थाने में पूछताछ की जा रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान ने बताया कि कटेरा थाना क्षेत्र के मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित थे। पुलिस करीब एक महीने से इन गांवों पर नजर रख रही थी।
इस दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी इनपुट मिले। इनपुट के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार रात गोपनीय तरीके से छापेमारी की योजना बनाई।
पुलिस कार्रवाई को गोपनीय रखने के लिए शहर के अलग-अलग थानों से फोर्स बुलाई गई। अभियान में शामिल पुलिसकर्मियों को भी इसकी पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। शुक्रवार रात पुलिस की टीमें अचानक तीनों गांवों में पहुंचीं। उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
इसके बाद एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस के अचानक पहुंचने से गांवों में हड़कंप मच गया। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग एफआईआर दर्ज कराने वाले लोगों के मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर फोन करते थे। केस में फंसाने या कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को धमकाते थे। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे ठग लेते थे।
पुलिस ने पकड़े गए करीब 60 से ज्यादा महिला-पुरुषों को कटेरा थाने लाकर पूछताछ शुरू कर दी है। सभी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। बरामद मोबाइल फोन, राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच हो रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के तरीके की जानकारी मिल सकती है।
'मिनी जामताड़ा' के नाम से चर्चित इन गांवों में पुलिस की छापेमारी के दौरान सायरन, नकली वर्दी, पुलिस कैप और पुलिस लोगो मिले। साइबर ठग वीडियो कॉल पर पीड़ितों को पुलिस की वर्दी और ये सामान दिखाकर डराते थे। वे पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट करने का झांसा देते थे, जिससे उन्हें लगता था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद केस में समझौते या कार्रवाई से बचाने के नाम पर उनसे पैसे ठग लेते थे।
साइबर क्राइम मामले में हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने के लिए समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉक्टर चंद्रपाल सिंह यादव पहुंचे हैं। एएसपी अरीबा नोमान ने बताया- करीब 60 लोगों को पूछताछ के लिए लाए हैं, जो अन्य आरोपियों की जानकारी देंगे। डॉक्टर चंद्रपाल सिंह यादव से बोलीं- किसी को गलत आरोपी नहीं बनाया जाएगा। आप बेफ्रिक रहें।
निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो हम हस्तक्षेप करेंगे
सपा पूर्व सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा- कटेरा थाने के अंतर्गत 4-5 गांवों से रात करीब 3 बजे भारी संख्या में पुलिस लोगों को उठाकर ले गई। शुरुआत में सूचना मिली थी कि 150-200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन यहां आकर पता चला कि करीब 60 लोग पूछताछ के लिए बैठे हैं।
हालांकि पुलिस का कहना है कि मामला साइबर क्राइम से जुड़ा है। लेकिन हम किसी अपराधी की मदद नहीं करना चाहते। जो दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अगर निर्दोष लोगों को बिना जांच के पकड़कर लाया गया है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने IG जोन और SSP झांसी से बात की है। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि जिनके खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
गांव के लोगों को परेशान करना ठीक नहीं है। पहले जांच होनी चाहिए, फिर दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। अभी पुलिस पूछताछ कर रही है, किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। अगर निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो हम हस्तक्षेप करेंगे।
साइबर क्राइम के आरोप में हिरासत में लिए गए तीन गांव के लोगों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता प्रदीप जैन आदित्य भी पुलिस लाइन पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह निर्दोष ग्रामीणों पर गलत कार्रवाई की गई तो वह बड़ा आंदोलन करेंगे। जिस प्रकार से दबिश दी गई, वह ठीक नहीं है। पुलिस ये भी स्पष्ट नहीं कर रही कि हिरासत में लिए गए ग्रामीण दोषी हैं या नहीं।
60 से ज्यादा लोग हिरासत में, फर्जी वर्दी व सायरन से शिकार को डराते थे लोगों को.
झांसी के तीन गांवों में चल रहे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने शुक्रवार रात मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव में एक साथ छापेमारी की। 60 से ज्यादा महिलाओं और पुरुषों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, ठगों ने थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक के फर्जी सेटअप बना रखे थे। मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, राउटर, पुलिस सायरन समेत साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला है। पकड़े गए लोगों से कटेरा थाने में पूछताछ की जा रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान ने बताया कि कटेरा थाना क्षेत्र के मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित थे। पुलिस करीब एक महीने से इन गांवों पर नजर रख रही थी।
इस दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी इनपुट मिले। इनपुट के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार रात गोपनीय तरीके से छापेमारी की योजना बनाई।
पुलिस कार्रवाई को गोपनीय रखने के लिए शहर के अलग-अलग थानों से फोर्स बुलाई गई। अभियान में शामिल पुलिसकर्मियों को भी इसकी पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। शुक्रवार रात पुलिस की टीमें अचानक तीनों गांवों में पहुंचीं। उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
इसके बाद एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस के अचानक पहुंचने से गांवों में हड़कंप मच गया। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग एफआईआर दर्ज कराने वाले लोगों के मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर फोन करते थे। केस में फंसाने या कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को धमकाते थे। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे ठग लेते थे।
पुलिस ने पकड़े गए करीब 60 से ज्यादा महिला-पुरुषों को कटेरा थाने लाकर पूछताछ शुरू कर दी है। सभी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। बरामद मोबाइल फोन, राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच हो रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के तरीके की जानकारी मिल सकती है।
'मिनी जामताड़ा' के नाम से चर्चित इन गांवों में पुलिस की छापेमारी के दौरान सायरन, नकली वर्दी, पुलिस कैप और पुलिस लोगो मिले। साइबर ठग वीडियो कॉल पर पीड़ितों को पुलिस की वर्दी और ये सामान दिखाकर डराते थे। वे पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट करने का झांसा देते थे, जिससे उन्हें लगता था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद केस में समझौते या कार्रवाई से बचाने के नाम पर उनसे पैसे ठग लेते थे।
साइबर क्राइम मामले में हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने के लिए समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉक्टर चंद्रपाल सिंह यादव पहुंचे हैं। एएसपी अरीबा नोमान ने बताया- करीब 60 लोगों को पूछताछ के लिए लाए हैं, जो अन्य आरोपियों की जानकारी देंगे। डॉक्टर चंद्रपाल सिंह यादव से बोलीं- किसी को गलत आरोपी नहीं बनाया जाएगा। आप बेफ्रिक रहें।
निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो हम हस्तक्षेप करेंगे
सपा पूर्व सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा- कटेरा थाने के अंतर्गत 4-5 गांवों से रात करीब 3 बजे भारी संख्या में पुलिस लोगों को उठाकर ले गई। शुरुआत में सूचना मिली थी कि 150-200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन यहां आकर पता चला कि करीब 60 लोग पूछताछ के लिए बैठे हैं।
हालांकि पुलिस का कहना है कि मामला साइबर क्राइम से जुड़ा है। लेकिन हम किसी अपराधी की मदद नहीं करना चाहते। जो दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अगर निर्दोष लोगों को बिना जांच के पकड़कर लाया गया है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने IG जोन और SSP झांसी से बात की है। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि जिनके खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
गांव के लोगों को परेशान करना ठीक नहीं है। पहले जांच होनी चाहिए, फिर दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। अभी पुलिस पूछताछ कर रही है, किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। अगर निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो हम हस्तक्षेप करेंगे।
साइबर क्राइम के आरोप में हिरासत में लिए गए तीन गांव के लोगों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता प्रदीप जैन आदित्य भी पुलिस लाइन पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह निर्दोष ग्रामीणों पर गलत कार्रवाई की गई तो वह बड़ा आंदोलन करेंगे। जिस प्रकार से दबिश दी गई, वह ठीक नहीं है। पुलिस ये भी स्पष्ट नहीं कर रही कि हिरासत में लिए गए ग्रामीण दोषी हैं या नहीं।