आज जब अधिकांश युवा अपनी सफलता को पदक और ट्रॉफियों तक सीमित रखते हैं, वहीं जयपुर के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, कावेरी पथ, मानसरोवर की छात्रा वाणी जैन ने शतरंज को समाज सेवा का माध्यम बनाकर एक नई मिसाल कायम की है साधारण परिवार में पली-बढ़ी वाणी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं।
कोरोना काल में उनके पिता ने शौक-शौक में उन्हें शतरंज सिखाया, जो आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन गया।
मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने जिला एवं राज्य स्तर की अनेक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई सम्मान अर्जित किए वाणी का मानना है कि सच्ची सफलता केवल स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है इसी सोच के साथ उन्होंने अब तक 10 से अधिक निःशुल्क शतरंज प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया है, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षकों के सहयोग से हजारों बच्चों को प्रशिक्षण दिलाया गया अपने 15वें जन्मदिन पर वाणी ने 15 दिनों तक 120 बच्चों को निःशुल्क शतरंज प्रशिक्षण दिया।
साथ ही सभी बच्चों को शतरंज बोर्ड, प्रमाण-पत्र और सम्मान-पत्र भी भेंट किए, ताकि आर्थिक अभाव किसी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने उनके इस अभियान से प्रभावित होकर जय श्री ज्वेलर्स ने प्रशिक्षण के लिए अपना परिसर उपलब्ध कराया।
वहीं अंतरराष्ट्रीय आर्बिटर भगवती प्रसाद शर्मा, वरिष्ठ प्रशिक्षक विक्रम सिंह, एडवोकेट पियूष शर्मा और दीपक राव सहित कई विशेषज्ञ भी बच्चों के मार्गदर्शन के लिए इस पहल से जुड़े वाणी के प्रयासों से अनेक बच्चे मोबाइल की दुनिया से निकलकर शतरंज की ओर बढ़ रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।
उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए हाल ही में उन्हें वूमेन पावर सोशलिटी फाउंडेशन इंडिया के राष्ट्रीय खेलकूद विभाग का ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किया गया है / वाणी का जीवन मंत्र है—"जो सीखो, उसे दूसरों को भी सिखाओ ज्ञान बांटने से समाज भी आगे बढ़ता है और स्वयं का विकास भी होता है वाणी जैन की कहानी यह संदेश देती है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते।
सच्चा संकल्प, मेहनत और सेवा की भावना ही व्यक्ति को समाज के लिए प्रेरणा बनाती है.