न्याय के लिये कानून का भी बलिदान करना पड़ता हैं - भगत सिँह कोश्यारी पूर्व महाराष्ट्र गवर्नर.न्याय में ना देर हो ना ही अंधेर हो - प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित " ज्यूरिस्ट कॉनक्लेव में हुआ विधिक मंथन "

देहरादून ! गुजराल फाउंडेशन द्वारा आयोजित ज्यूरिस्ट कॉनक्लेव के उद्घाटन सत्र में महाराष्ट्र के पूर्व रज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी नें देश की न्याय व्यवस्था में सुधार पर बल दिया, पद्मभूषण से सम्म

ानित भगत सिंह कोश्यारी ने आगे कहा कि न्याय के लिये कानून का भी बलिदान करना पड़ता हैं , वही हाईकोर्ट जस्टिस राकेश टंडन नें विधि के छात्रों को न्यायालय के द्वारा दिये जा रहे न्याय के प्रति जागर

ूक रहने पर बल दियादेवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग के डीन, प्रोफेसर (डॉ.) अनिल कुमार दीक्षित ने अपने सम्बोधन में कहा कि, न्याय में ना देर हो ना ही अंधेर हो, इसके लिये बार औऱ बेंच दो

नों को अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी निभानी होंगी l पूर्व न्यायिक अधिकारी श्री महेस्वरी ने कहा कि न्याय में देरी संविधान के प्रति अपराध हैं देहरादून जिला न्यायालय के जनपद न्यायाधीश श्री प्रेम सिँह ज़

ी को आज उनकी सेवानिवृति पर उन्हें फाउंडेशन की अध्यक्ष रितु गुज़राल द्वारा सम्मानित किया गया इसी के साथ साथ उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ज़ी को भी सम्मानित किया गया ज्यूरिस्ट क

ॉनक्लेव में उत्तराखंड प्रदेश के वरिष्ठ अधिवक्तागण, विधिक छेत्र सेम्बंधित समाजसेवी आदि उपस्थिति रहे l भाजपा की प्रदेश महामंत्री दीप्ती रावत भारद्वाज ने आयोजन की सफलता का श्रेय फाउंडेशन की कड़ी

मेहनत एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी के निर्वहन को दी l

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Surendra Sapera

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Reporter Lalitpur Up

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