o*80वें स्वतंत्रता दिवस पर गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश, कुलपति ने कहा—ज्ञान, नवाचार और युवा शक्ति से बनेगा विकसित भारत*
*कृषि विश्वविद्यालय में शान से लहराया तिरंगा, एनसीसी, एनएसएस एवं पीआरडी जवानों ने दी सलामी*
*कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने वैज्ञानिकों से किया आह्वान—बुंदेलखंड की कृषि समस्याओं के समाधान के लिए आधुनिक विज्ञान और नई तकनीकों को खेतों तक पहुंचाएं*
*झाँसी।* रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में शनिवार को देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रभक्ति, उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करने से हुई। इसके पश्चात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत माता जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। उपरांत विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगीत की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने एक स्वर में राष्ट्रगान गाया।
एनसीसी, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों तथा पीआरडी जवानों ने अनुशासित एवं आकर्षक परेड प्रस्तुत कर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी।
*स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी है—कुलपति*
अपने संबोधन में कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि देश की स्वतंत्रता, एकता और अखंडता को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक नागरिक को अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी और निष्ठा के साथ योगदान देकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करना होगा।
उन्होंने देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और भारत माता के वीर सपूतों को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें उनके अद्भुत साहस, अथक संघर्ष और मातृभूमि के प्रति अतुलनीय समर्पण का स्मरण कराता है।
उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता बड़े त्याग, संघर्ष और बलिदान के बाद मिली है। महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी मार्च, नमक सत्याग्रह सहित अनेक आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को जन-जन का आंदोलन बनाया। आज की पीढ़ी का दायित्व है कि वह स्वतंत्रता के मूल्यों को समझे और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
*युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत—डॉ. अशोक कुमार सिंह*
कुलपति ने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प में युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत और परिवर्तन की वाहक है। युवाओं को शिक्षा, कौशल, उद्यमिता, तकनीकी नवाचार, नेतृत्व और नागरिक सहभागिता से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवा केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें और अपने ज्ञान एवं कौशल के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दें।
उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना ने युवा अवस्था में मातृभूमि की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया। शहीद भगत सिंह और खुदीराम बोस जैसे युवाओं ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।
स्वामी विवेकानंद ने भी युवाओं में आत्मविश्वास, राष्ट्रभाव और सेवा की चेतना जगाने का कार्य किया।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि विश्वविद्यालय में प्राप्त शिक्षा को समाज और राष्ट्र की सेवा से जोड़ें।
*कृषि शिक्षा, शोध और प्रसार को गांव-गांव तक पहुंचाना प्राथमिकता*
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और प्रसार के माध्यम से किसानों और ग्रामीण समाज की समस्याओं के समाधान की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। वैज्ञानिकों को बुंदेलखंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नई तकनीकें विकसित कर उन्हें किसानों तक पहुंचाना होगा।
उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि कृषि क्षेत्र में नया ज्ञान, नया विज्ञान और आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचाई जाए। युवाओं को ज्ञान के साथ-साथ कौशल से जोड़ा जाए, ताकि विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने में सक्षम बनें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आधुनिक तकनीक और निरंतर कौशल उन्नयन का ज्ञान आवश्यक है।
*विश्वविद्यालय ने विकसित कीं 12 नवीन कृषि तकनीकें*
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा बुंदेलखंड की कृषि एवं ग्रामीण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 12 नवीन तकनीकों एवं प्रौद्योगिकीय मॉडलों को विकसित एवं बढ़ावा दिया जा रहा है। इन तकनीकों के विकास एवं शोध कार्यों में विश्वविद्यालय के *निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी* के मार्गदर्शन एवं वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का शोध तंत्र क्षेत्रीय समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
इनमें प्रमुख रूप से—
तैयार जामुन ऐपेटाइजर बनाने की विधि।
बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए ड्रैगन फ्रूट एवं स्ट्रॉबेरी की अंतरफसल खेती का मॉडल।
बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए नीम-दलहन आधारित कृषि वानिकी मॉडल।
औद्योगिक कृषि वानिकी के अंतर्गत अदरक, हल्दी एवं अरबी के उत्पादन की उन्नत प्रौद्योगिकियां।
बुंदेलखंड क्षेत्र में अदरक के प्रकंद सड़न रोग का प्रबंधन।
हल्की मिट्टी में नमी संरक्षण एवं वर्षाजल संचयन के लिए मक्का और ज्वार की मेड़ एवं नाली प्रणाली।
सतत् उत्पादन के लिए विविधीकृत फसल प्रणालियों का विकास।
फूलों, पत्तियों एवं पौधों के विभिन्न भागों से प्राकृतिक रंगों द्वारा हर्बल गुलाल तैयार करने की तकनीक।
अर्ध-शुष्क बुंदेलखंड में भूजल क्षमता मानचित्रण के लिए मशीन लर्निंग आधारित मॉडल।
जियोटैगिंग के माध्यम से डीजीपीएस-सक्षम वृक्ष निगरानी प्रणाली।
वर्षभर फूलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आंतरायिक रोपण एवं पुष्प फसल मॉडल।
बुंदेलखंड क्षेत्र में सरसों की अधिक पैदावार के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तकनीक।
कुलपति ने कहा कि इन तकनीकों का उद्देश्य केवल शोध तक सीमित रहना नहीं, बल्कि इन्हें किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप खेतों तक पहुंचाकर बुंदेलखंड में कृषि उत्पादकता, आय और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देना है।
*वैज्ञानिकों को पेटेंट के लिए किया सम्मानित*
इस अवसर पर कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने नवीन तकनीकों एवं पेटेंट कार्यों में योगदान देने वाले विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक यदि नई और उपयोगी तकनीकों पर कार्य करना चाहते हैं तो विश्वविद्यालय उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने *निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी* सहित शोध से जुड़े सभी वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शोध का अंतिम उद्देश्य किसानों और समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
*कम वर्षा के बीच आधुनिक विज्ञान पर विशेष जोर देने की जरूरत*
कुलपति ने बुंदेलखंड में कम वर्षा की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में अभी सामान्य वर्षा की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत वर्षा ही हुई है। ऐसी परिस्थितियों में जल संरक्षण, वर्षाजल संचयन, सूखा-सहिष्णु कृषि, आधुनिक सिंचाई तकनीकों और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान ऐसी संपदा है जो सदैव टिकाऊ रहती है। इसलिए विश्वविद्यालय को ज्ञान, शोध और नवाचार को निरंतर आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने विश्वविद्यालय में विकसित सेंट्रल एक्सीलेंस लैब को शोध एवं नवाचार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और इसके विकास में केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
*खेल सुविधाओं का विद्यार्थी अधिक से अधिक लाभ उठाएं*
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
विद्यार्थियों को नियमित रूप से इन सुविधाओं का लाभ उठाते हुए शिक्षा के साथ खेल और शारीरिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना और विकास का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, शोध, कौशल और सर्वांगीण विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।
विश्वविद्यालय का उद्घाटन वर्ष 2020 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया था।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान करते हुए कहा कि हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाने का संकल्प लें, जिसे पूरी दुनिया ‘विकसित भारत’ के रूप में पहचाने।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान की प्रस्तुति हुई। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा देशभक्ति से ओत-प्रोत मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनसे पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम से सराबोर हो गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी, अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी-कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया, जबकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एसएस कुशवाह ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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