दसलक्षण पर्व के आठवें दिन मनाया गया उत्तम त्याग धर्म, लघु नृत्य नाटिका ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

विदिशा के श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में पर्युषण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म मनाया गया। मंदिर के प्रवक्ता डॉ. मक्खन लाल जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिदिन रात्रि में बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जा रही है, जिससे मनोरंजन के साथ-साथ धर्म का ज्ञान भी मिल रहा है। इसी क्रम में रात्रि में 'जीवन यात्रा' नामक लघु नाटिका का मंचन किया गया, जिसमें बचपन से बुढ़ापे तक के सफर को रेलगाड़ी के माध्यम से दर्शाते हुए भक्ति और धर्म के महत्व को रोचक तरीके से समझाया गया। ट्रस्ट अध्यक्ष ने आज रात्रि आयोजित होने वाले 'धर्म के धुरंधर' ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होने की अपील की है।

पंडित संयम शास्त्री ने समयसार नाटिका ग्रंथ पर स्वाध्याय के दौरान 'भेद विज्ञान' पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भेद विज्ञान एक प्रक्रिया है। उन्होंने समझाया कि दुनिया को धोखा दिया जा सकता है, लेकिन तीन नेत्रों से नहीं—पहला धर्म, दूसरा आत्मा के चारों ओर चिपकी कर्म वर्गणा और तीसरा हम स्वयं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तप का अर्थ शरीर को सताना नहीं है, बल्कि ज्ञानी पुरुषों के विचारों को अपनाना है। उन्होंने कहा कि ज्ञानी कहते हैं कि 'मैं ज्ञायक हूँ और पर पदार्थ मेरे नहीं हैं', इसे स्वीकार करना ही भेद विज्ञान है।

पंडित संयम शास्त्री ने आगे कहा कि शास्त्र कहानियों के लिए नहीं, बल्कि आईना देखने के लिए हैं। उन्होंने सती अंजना के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक पर पदार्थों में सुख की बुद्धि बनी रहेगी, तब तक संसार में भटकना पड़ेगा।

सायंकालीन प्रवचन में उत्तम त्याग धर्म पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि त्याग करने से पहले यह विचार करना आवश्यक है कि छोड़ा किसने और क्या छोड़ा? जब तक 'मैंने छोड़ा' का अहंकार है, तब तक वह त्याग नहीं बल्कि भोग ही है। जैन धर्म के अनुसार, जो पर पदार्थों को ग्रहण ही नहीं करता, वही सच्चा त्यागी है। पर पदार्थ को अपना मानना ही ग्रहण करना है और उसे अपना न मानना ही वास्तविक त्याग है। उन्होंने कहा कि बाहरी त्याग सभी को दिखाई देता है, लेकिन अभ्यंतर त्याग अदृश्य होता है। असली परीक्षा तब होती है जब निंदा होने पर भी मन में राग-द्वेष न आए और व्यक्ति ज्ञायक भाव में स्थित रहे, यही उत्तम त्याग धर्म है।

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शोभित जैन

@jainshobhit5

विदिशा REPORTER

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