श्रुत पंचमी महोत्सव के प्रथम दिन श्री चौबीस तीर्थंकर विधान के साथ महा महोत्सव का शुभारंभ

📰 शोभित जैन

विदिशा। श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा द्वारा श्रुत पंचमी के पावन पर्व पर त्रय दिवसीय धार्मिक आयोजन किया जा रहा है।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि 19 जून 2026, शुक्रवार से 21 जून 2026, रविवार तक श्री चौबीस तीर्थंकर लघु विधान, श्री योगसार लघु विधान एवं श्री द्रव्यसंग्रह विधान का भव्य आयोजन होगा।
प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि इस महोत्सव में विशिष्ट विद्वत् समागम के रूप में अनुभव शास्त्री, करेली व विधानाचार्य आदर्श शास्त्री, बड़ा मलहरा के तत्वाधान में हुआ । ध्वजारोहणकर्ता पं शिखरचन्द जैन अलंकार ज्वेलर्स परिवार द्वारा किया गया। विधानइन्द्र के रूप में सत्येन्द्र लश्करी, गगन जैन खेरुआ, ऋषि खादी भण्डार एवं अनर्घ्य शास्त्री विराजमान हुए।
19 जून प्रातः 7:15 बजे ध्वजारोहण हुआ तत्पश्चात चिरंतन बड़कुल व आगम शास्त्री द्वारा कार्यक्रम का संचालन करते हुए 7:30 बजे से कलश विधि एवं जिनवाणी विराजमान श्रीमती सन्तोषनी शराफ, श्रीमती मनोबाला जैन,श्रीमती शालिनी बड़कुल,श्रीमती सुनीता मोदी व श्रीमती इंद्रा सिंघई द्वारा प्रमुख ग्रंथ के साथ शोभा यात्रा के साथ मंडप स्थान पर विराजमान किया तत्पश्चात 7:45 बजे प्रक्षाल पूजन विधान - चौबीस तीर्थंकर लघु विधान सम्पन्न हुआ,9:10 बजे से प्रवचन, रात्रि 8 से 8:30 बजे भक्ति एवं 8:30 से 9:30 बजे तक प्रवचन सम्पन्न हुए।

पंडित अनुभव शास्त्री करेली द्वारा
श्रुत पंचमी पर सूत्रपहुड़ ग्रंथ के माध्यम से श्रुत परंपरा का महत्व बताया।उन्होंने आचार्य कुंदकुंद द्वारा रचित पंच परमागम में से एक अष्ट पाहुड ग्रंथ के सूत्र पाहुड विषय पर व्याख्यान दिया। इस प्रवचन के माध्यम से उन्होंने श्रुत क्या है, श्रुत परंपरा का महत्व और श्रुत पंचमी के महत्व को समझाया। दसवें तीर्थंकर शीतलनाथ भगवान के चार कल्याणकों से धन्य हुई विदिशा वसुंधरा का षट्खंडागम जी से विशिष्ट संबंध है।

षट्खंडागम जी को सर्वप्रथम छपाने हेतु विद्वानों के समझाने पर अपनी "पंचकल्याणक-गजरथ" कराने की भावना को छोड़ विदिशा के सेठ लक्ष्मीचंद्र जी ने सन् 1933 में दश हजार रुपए प्रदान किये।( 93 वर्ष पूर्व यह राशि आज करोड़ों रुपए होगी)। विदिशा के ही करणानुयोग के विशिष्ट विद्वान - श्रेष्ठी पं.जवाहरलाल जी बड़कुल ने षट्खंडागम जी को "श्री सीमंधर आगम जिनालय" में संगमरमर पर उत्कीर्ण कराकर भौतिक रूप से अमर कर दिया। इसी जिनालय में कविवर पं. राजमल पवैया द्वारा रचित षट्खंडागम विधान सर्वप्रथम सम्पन्न हुआ।

20 जून को प्रातः 7:30 बजे प्रक्षाल पूजन विधान - योगसार लघु विधान, 9:00 बजे प्रवचन, रात्रि 8 से 8:30 बजे भक्ति एवं 8:30 बजे प्रवचन होंगे। ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन व समस्त ट्रुस्टियो ने सभी से धर्म लाभ लेने की अपील की।

इस आयोजन के निवेदक श्री दि. जैन परवार समाज पंचायत समाज समिति विदिशा हैं। सहयोगी महिला मण्डल बड़ा जैन मंदिर विदिशा एवं अखिल भारतीय जैन युवा एवं महिला फेडरेशन हैं।
श्री दि. जैन समाज विदिशा एवं मुमुक्षु मंडल विदिशा के सहयोग से आयोजित इस पावन महोत्सव में सभी भक्तों से सादर सविनय अनुरोध है कि पधारकर धर्म लाभ प्राप्त करें। स्थान श्री शीतलनाथ दि. जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा (म.प्र.)

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ATUL JAIN

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Senior Reporter Shivpuri

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