कुंभकरण, मेघनाथ और रावण वध की लीला का भव्य मंचनरावण के अंतिम उपदेश ने दर्शकों को दिया जीवन का महत्वपूर्ण संदेश.

ललितपुर। श्री लक्ष्मीनृसिंह मंदिर, तालाबपुरा में आयोजित रामलीला के ग्यारहवें दिवस कुंभकरण वध, मेघनाथ वध एवं रावण वध की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। वृंदावन से आई श्री किशोरी रासलीला एवं रामलीला संस्थान के कलाकारों ने संस्थापक स्वामी श्री ओमप्रकाश जी के कुशल नेतृत्व में मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम की सेना और रावण की सेना के बीच हुए भीषण युद्ध का सजीव मंचन किया गया। सबसे पहले भगवान श्रीराम की सेना ने कुंभकरण का वध किया। इसके बाद लक्ष्मण जी ने युद्ध में मेघनाथ का वध कर रावण की सेना को कमजोर कर दिया। अंत में भगवान श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। रावण वध के मंचन के दौरान दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।

रावण ने लक्ष्मण जी को दिया अंतिम उपदेश

रामलीला का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग उस समय देखने को मिला, जब रावण के धराशायी होने के बाद भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण जी को उसके पास जाकर ज्ञान प्राप्त करने का आदेश दिया। भगवान श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए लक्ष्मण जी रावण के पास पहुंचे और उससे अंतिम उपदेश प्राप्त किया।

रावण ने अपने अंतिम उपदेश में जीवन की महत्वपूर्ण सीख देते हुए कहा कि मनुष्य को कभी भी अपने शत्रु को कमजोर या छोटा नहीं समझना चाहिए। शत्रु की शक्ति, क्षमता और रणनीति को कम आंकना भारी पड़ सकता है। साथ ही, प्रत्येक परिस्थिति में अपने ज्ञान, विवेक और सामर्थ्य का उचित उपयोग करना चाहिए।

रावण के अंतिम उपदेश के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली और ज्ञानी क्यों न हो, अहंकार और गलत निर्णय उसके पतन का कारण बन सकते हैं। रामलीला के इस प्रसंग ने दर्शकों को धर्म, मर्यादा, विवेक और जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों से परिचित कराया।

इस प्रकार रामलीला के ग्यारहवें दिवस की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को धर्म की विजय और अधर्म के अंत का संदेश दिया। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों को दर्शकों ने सराहा।इस अवसर पर महंत गंगादास महाराज, महंत रामलखन महाराज, नारायण दास महाराज, रामवखन दास, मुकुट बिहारी दीक्षित, एडवोकेट भगवत अग्रवाल, भाजपा के प्रदेश मंत्री अनिल यादव, प्रदीप चौबे, रामलीला समिति के अध्यक्ष राजीव बबेले, सुभाष जायसवाल, मुन्नालाल जैन, बीके सरदार, धर्मेंद्र रावत, डॉ. राजकुमार जैन, रमेश रावत, सुनील शर्मा, शशि भूषण बुंदेला, निखिल तिवारी, जगदीश पाठक, देवेंद्र चतुर्वेदी, विलास पटैरिया, उदित रावत, गंधर्व सिंह लोधी, भगवत नारायण बाजपेयी, प्रदीप खैरा, कमलापत रिछारिया, संजय डयोडिया, महेश रामेश्वर मालवीय, भरत रिछारिया, अमन, जितेन्द्र सिंह परमार, संजय जैन राजूसेठ, दीपक तिवारी, आयुष रिछारिया, हरीबाबू शर्मा, महेश श्रीवास्तव, छक्की लाल साहू, डॉ. आरके अग्रवाल, कमलेश चौधरी, लकी चौधरी, उमाशंकर विदुआ, डॉ. दीपक चौबे, अजीत जैन भारती, वीरेंद्र पुरोहित, नरेंद्र कड़की, भरत पुरोहित, कल्पनीत सिंह लोधी, नरेश विदुआ, प्रभाकर शर्मा, रमाशंकर शर्मा, गिरीश पाठक सोनू, अजय तोमर, राजेंद्र बाजपेयी, हृदेश हुंडैत, विवेक सडैया, हरिशंकर साहू, अनिल नायक, आशीष चौबे, गौरव जैन, नारायण यादव, मनोहर यादव, राजू यादव, हरि यादव, कौस्तुभ चौबे, कृष्णकांत तिवारी, चंद्रशेखर राठौर, संजू श्रोती, अजय नायक, विनोद अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, सुबोध गोस्वामी, हाकिम सिंह, कल्लू तिवारी, रामगोपाल ताम्रकार, नितिन गिरि, प्रेम बिहारी, दिनेश शर्मा, देवकीनंदन साहू, प्रशान्त तिवारी, मनोज वैध, बबलू पाठक, दिवाकर शर्मा, नरेंद्र पाठक, अरविंद संज्ञा, शंकर कुशवाहा, रजनीश गिरि, पंकज सेन, नरेश शेखावत, हिमांशु दुबे, ई. दीपक शर्मा, राहुल साहू खिरिया, आशीष तिवारी, आलोक चतुर्वेदी, प्रमोद गोस्वामी, शुभम कौशिक, रंजीत राजा, कमलेश सेन और मीडिया प्रभारी पंकज रैकवार सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

लेखक के बारे में

Surendra Sapera

@saperasurendra50

Reporter Lalitpur Up

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