इंदौर। सर सेठ हुकुमचंद जी की धर्म नगरी में पर्युषण महापर्व के पश्चात सकल जैन समाज द्वारा निकाली गई भव्य शोभायात्रा ने एक ऐसा अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। तीर्थ चक्रवर्ती परम पूज्य सुधा सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में आयोजित इस शोभायात्रा में हजारों श्रावक, संस्कार शिविरार्थी और समाजजन शामिल हुए।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह ऐतिहासिक शोभायात्रा सुबह विध्या सुधा देशना मंडप (दलाल बाग) से प्रारंभ हुई। यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए मोदी जी की नसिया, रामाशाह मंदिर, लश्करी मंदिर, राजवाड़ा, शक्कर बाजार के तीन मंदिरों और काँच मंदिर पहुंची। विभिन्न जिनालयों में दर्शन-वंदन करने के पश्चात यह शोभायात्रा पुनः तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में संपन्न हुई।
राजेश जैन दद्दू ने कहा कि इस शोभायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता अनुशासन, एकरूपता, धार्मिक उत्साह और तपस्वियों सहित हजारों समाजजनों की सहभागिता रही। इंदौर में पहली बार हजारों शिविरार्थियों का एक साथ शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से चलना देखने को मिला, जो गुरुदेव की प्रेरणा और धर्म प्रभावना की शक्ति का परिचायक बना।
नवीन गोधा ने बताया कि शोभायात्रा के स्वागत के लिए सुबह से ही समाजजन अपने घरों से निकलकर सड़कों के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े रहे। मार्ग में जगह-जगह मंच बनाए गए थे, जहाँ शिविरार्थियों का अक्षत और पुष्पों से भव्य स्वागत किया गया। पूरे मार्ग में धार्मिक वातावरण, जयघोष और भक्ति की भावना व्याप्त रही। हर्ष जैन ने कहा कि यह केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि जैन समाज की एकता, संस्कार, अनुशासन और धर्म के प्रति समर्पण का जीवंत दर्शन था।
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में सकल जैन समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा। आयोजन में अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, हर्ष जैन, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटौदी, अक्षय कासलीवाल, आकाश आलोक कोल, अभिषेक अजमेरा, संजय सामरिया, जयदीप जैन, जेनेश झांझरी, राहुल स्पोर्ट्स सहित संपूर्ण जैन समाज के अनेक कार्यकर्ताओं और समाजबंधुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हजारों शिविरार्थियों का एक साथ अनुशासनपूर्वक चलना और पूरे मार्ग में समाज द्वारा किया गया आत्मीय स्वागत इंदौर के जैन समाज के इतिहास का एक अविस्मरणीय दृश्य बन गया है। यह गुरुदेव के पुण्य प्रताप, शिविर के संस्कारों और सकल जैन समाज की एकजुटता का अद्भुत परिणाम है।
इंदौर। सर सेठ हुकुमचंद जी की धर्म नगरी में पर्युषण महापर्व के पश्चात सकल जैन समाज द्वारा निकाली गई भव्य शोभायात्रा ने एक ऐसा अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। तीर्थ चक्रवर्ती परम पूज्य सुधा सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में आयोजित इस शोभायात्रा में हजारों श्रावक, संस्कार शिविरार्थी और समाजजन शामिल हुए।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह ऐतिहासिक शोभायात्रा सुबह विध्या सुधा देशना मंडप (दलाल बाग) से प्रारंभ हुई। यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए मोदी जी की नसिया, रामाशाह मंदिर, लश्करी मंदिर, राजवाड़ा, शक्कर बाजार के तीन मंदिरों और काँच मंदिर पहुंची। विभिन्न जिनालयों में दर्शन-वंदन करने के पश्चात यह शोभायात्रा पुनः तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में संपन्न हुई।
राजेश जैन दद्दू ने कहा कि इस शोभायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता अनुशासन, एकरूपता, धार्मिक उत्साह और तपस्वियों सहित हजारों समाजजनों की सहभागिता रही। इंदौर में पहली बार हजारों शिविरार्थियों का एक साथ शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से चलना देखने को मिला, जो गुरुदेव की प्रेरणा और धर्म प्रभावना की शक्ति का परिचायक बना।
नवीन गोधा ने बताया कि शोभायात्रा के स्वागत के लिए सुबह से ही समाजजन अपने घरों से निकलकर सड़कों के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े रहे। मार्ग में जगह-जगह मंच बनाए गए थे, जहाँ शिविरार्थियों का अक्षत और पुष्पों से भव्य स्वागत किया गया। पूरे मार्ग में धार्मिक वातावरण, जयघोष और भक्ति की भावना व्याप्त रही। हर्ष जैन ने कहा कि यह केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि जैन समाज की एकता, संस्कार, अनुशासन और धर्म के प्रति समर्पण का जीवंत दर्शन था।
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में सकल जैन समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा। आयोजन में अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, हर्ष जैन, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटौदी, अक्षय कासलीवाल, आकाश आलोक कोल, अभिषेक अजमेरा, संजय सामरिया, जयदीप जैन, जेनेश झांझरी, राहुल स्पोर्ट्स सहित संपूर्ण जैन समाज के अनेक कार्यकर्ताओं और समाजबंधुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हजारों शिविरार्थियों का एक साथ अनुशासनपूर्वक चलना और पूरे मार्ग में समाज द्वारा किया गया आत्मीय स्वागत इंदौर के जैन समाज के इतिहास का एक अविस्मरणीय दृश्य बन गया है। यह गुरुदेव के पुण्य प्रताप, शिविर के संस्कारों और सकल जैन समाज की एकजुटता का अद्भुत परिणाम है।