अनंत चौदस की धारा के साथ दशलक्षण धर्म का हुआ समापन,श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, किला अंदर में हुआ भव्य इंद्र सभा का मंचन

विदिशा में अनंत चतुर्दशी महापर्व हर्षोल्लास के साथ संपन्न, धर्म सभा में ब्रह्मचर्य धर्म पर हुई चर्चा

विदिशा स्थित श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, किला अंदर में दिगम्बर जैन समाज का सबसे बड़ा पर्व अनंत चतुर्दशी महापर्व बड़े ही भक्ति भाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर के प्रवक्ता डॉ. मक्खन लाल जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के अवसर पर सुबह से ही श्रीजी के अभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। नित्य पूजन और विधान के पश्चात भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया गया और निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।

दोपहर के सत्र में भगवान का अभिषेक, चौदस की धारा और दशलक्षण धर्म की पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान चौदस की धारा का सौभाग्य प्रथम इंद्र अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन, द्वितीय इंद्र प्रदुम्न सिंघई परिवार, तृतीय इंद्र अनेकांत एकांत शीतल ज्वैलर परिवार, चतुर्थ इंद्र सतेंद्र लश्करी परिवार और पंचम इंद्र के रूप में राजेन्द्र एवं इंजीनियर राजीव जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

धर्म सभा में मुंबई विले पार्ले से पधारे पंडित संयम शास्त्री ने उत्तम क्षमा आदि दस धर्मों के स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने दस दिनों तक समयसार नाटिका जैसे प्रमुख ग्रंथों पर मार्मिक स्वाध्याय कराया। कार्यक्रम के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर चर्चा करते हुए पंडित संयम शास्त्री ने कहा कि ब्रह्म यानी आत्मा और उसमें रमण करना ही ब्रह्मचर्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर पदार्थों में सुख की बुद्धि ही अब्रह्म है। जो व्यक्ति पर से हटकर अपने ज्ञायक स्वरूप में लीन होता है, वही सच्चा ब्रह्मचारी है और यही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है।

इस कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर नितिन जैन और एसडीएम मनीष जैन विशेष रूप से शामिल हुए। प्रवक्ता डॉ. मक्खन लाल जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व के समापन पर रात्रि कालीन भक्ति और प्रवचन के पश्चात इंद्र सभा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सौधर्मेन्द्र सहित इंद्र-इंद्राणियों ने धार्मिक प्रश्नों पर चर्चा की। इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने अनंत व्रत धारण कर सुख-समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मलुकचंद जैन, मंत्री एडवोकेट चक्रवर्ती जैन, रवि पटेल, राजकुमार जैन, राकेश मोदी, वीरेंद्र मानपुर, प्रकाश सिंघई, संजय अलंकार, रीतेश करैया, सुरेंद्र जैन और डॉ. एम.एल. जैन सहित सकल जैन समाज की उपस्थिति रही। अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया।

लेखक के बारे में

शोभित जैन

@jainshobhit5

विदिशा REPORTER

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