विदिशा से कुण्डलपुर रवाना जैन पाठशालाओं का दो दिवसीय सम्मेलन में"-170 पाठशालाओं के करीब 1000 शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कार्यकर्ता होंगे शामिल, ज्ञानवर्धन और धर्मशिक्षा पर होगा मंथन

कुण्डलपुर में जैन पाठशालाओं का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू, विदिशा से प्रतिनिधि हुए रवाना

कुण्डलपुर में आयोजित जैन पाठशालाओं के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कार्यकर्ताओं के दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए विदिशा से प्रतिनिधि रवाना हो गए हैं। इस सम्मेलन में विदिशा से प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ और अनिल मसाला सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल होंगे। शनिवार और रविवार को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में करीब 170 जैन पाठशालाओं के लगभग 1000 शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कार्यकर्ता सहभागी होंगे।

सम्मेलन के दौरान पाठशालाओं के संचालन, बच्चों के संस्कार निर्माण और धर्म शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस आयोजन के संदर्भ में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि ज्ञानवर्धन और ज्ञान यज्ञ का अवसर है। दो दिनों तक शिक्षक-शिक्षिकाएं और कार्यकर्ता अपने अनुभव साझा करेंगे तथा पाठशालाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के उपायों पर मंथन करेंगे। मुनिश्री ने कहा कि बच्चों को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ने में पाठशालाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुनिश्री ने बताया कि इस आयोजन को आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त है और सभी मुनिराजों द्वारा सम्मेलन में उपस्थित शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जैन पाठशाला केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और संस्कारों की आधारशिला है। वर्तमान समय में जब बच्चे शिक्षा और रोजगार के लिए देश-दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में जाते हैं, तब उनके भीतर बचपन से ही धर्म, संस्कृति और संस्कारों की समझ विकसित करना आवश्यक है।

मुनिश्री ने आगे कहा कि जो बच्चे पांच-छह वर्ष तक पाठशाला में नियमित रूप से धर्म और संस्कारों का अध्ययन कर लेते हैं, वे उच्च शिक्षा और कार्यक्षेत्र में जाने के बाद भी अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहते हैं। उन्होंने समाजजनों से आह्वान किया कि प्रत्येक गांव और नगर में संचालित जैन पाठशालाओं को समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कारित करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। कुण्डलपुर का यह सम्मेलन पाठशाला संचालन से जुड़े कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा, दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगा।

समता सरोवर के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं अनिल मसाला ने जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन में विभिन्न पाठशालाओं से आने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं और कार्यकर्ताओं के अनुभवों का आदान-प्रदान होगा। इस सम्मेलन के माध्यम से धर्म शिक्षा और संस्कार निर्माण के कार्य को गांव-गांव और नगर-नगर तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। आयोजन को सफल बनाने में प्रबंधकारिणी का महत्वपूर्ण सहयोग है।

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शोभित जैन

@jainshobhit5

विदिशा REPORTER

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